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चीनी नौसेना का आधुनिकीकरण चिंता की बड़ी वजह: जोशी

Mon, 03 Dec 2012 09:47 PM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
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चीन की नौसेना के तेजी से आधुनिकीकरण पर गंभीर चिंता जताते हुए नौसेना प्रमुख एडमिरल डीके जोशी ने सोमवार को स्पष्ट शब्दों में कहा है कि भारत विवादास्पद दक्षिण चीन सागर में अपने हितों की रक्षा करेगा और जरूरत पड़ने पर हम वहां पर अपनी नौसेना को भी भेजने को तैयार हैं।
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प्रेस कांफ्रेंस में नौसेना प्रमुख ने कहा कि चीनी नौसेना का आधुनिकीकरण वास्तव में प्रभावशाली है। हकीकत में यह हमारे लिए एक बड़ा चिंता का कारण भी है, इसका हम निरंतर आकलन करते हैं और अपनी रणनीति और विकल्पों पर काम करते हैं। जोशी चीनी नौसेना के आधुनिकीकरण और दक्षिण चीन सागर में भारतीय हितों की रक्षा संबंधी सवालों के जवाब दे रहे थे। दक्षिण चीन सागर में ओएनजीसी विदेश की तेल खोज की गतिविधियों को लेकर भारत और चीन के बीच विवादों पर जोशी ने कहा कि इस समुद्री क्षेत्र में भारत की उपस्थिति बहुत ज्यादा नहीं है। भारत की रुचि केवल निर्बाध परिवहन और प्राकृतिक संसाधनों की खोज को लेकर है।

जब देश के हितों का सवाल होगा तो सुरक्षा मुहैया कराने वहां पर जरूर जाएंगे और हम इसके लिए तैयार हैं। दक्षिण चीन सागर में भारतीय हितों के बारे में उन्होंने कहा कि सर्वप्रथम नौवहन की स्वतंत्रता है। चीन के आक्रामक रुख को देखते हुए क्या नौसेना ने अपने संचालन नियमों में कोई परिवर्तन किया है तो जोशी ने कहा कि संचालन नियम किसी क्षेत्र विशेष के हिसाब से तय नहीं होते। सभी को आत्मरक्षा का अधिकार है।
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2013 के अंत तक नौसेना में शामिल हो जाएगा गोर्शकोव
नौसेना प्रमुख एडमिरल डीके जोशी का कहना है कि बहुप्रतीक्षित विमानवाहक पोत एडमिरल गोर्शकोव के अगले साल के अंत तक नौसेना में शामिल किए जाने की संभावना है। वर्तमान में पोत का रूस में प्रशिक्षण किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि देश के लिए एक खुशखबरी है कि स्वदेश निर्मित परमाणु शक्ति युक्त पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत को बहुत ही जल्द तैयार कर लिया जाएगा।

जल्द से जल्द हमलावर हेलीकॉप्टर चाहती है सेना
अपनी लड़ाकू एयर विंग के सरकार से मंजूरी मिलने के बाद अब सेना जल्द से जल्द वायुसेना से हमलावर हेलीकॉप्टरों का हस्तांतरण चाहती है। सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह ने बताया कि हमने अपनी फ्लीट में हमलावर हेलीकॉप्टरों को शामिल कर विमानन विंग की क्षमता वृद्धि के लिए एक प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को भेजा है। साथ ही अधिकारियों को देश के विभिन्न हिस्सों में हमलावर हेलीकॉप्टरों के इस्तेमाल के लिए एक रूपरेखा तैयार करने को कहा है। हालांकि सेना प्रमुख ने विस्तृत जानकारी नहीं दी। सूत्रों ने बताया कि प्रस्ताव में वायुसेना से हस्तांतरित किए जाने वाले हमलावर हेलीकॉप्टरों का भी उल्लेख किया गया। समयसीमा के बारे में सूत्रों ने कहा कि सेना इन्हें जल्द से जल्द चाहती है। सेना की योजना इन हेलीकॉप्टरों को चीन और पाकिस्तान से लगती सीमा पर तैनात करने की है।
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