तिब्बती आध्यात्मिक गुरू दलाई लामा ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कार्यकाल में क्षेत्र में सद्भाव और एकता के लिए नीतियों में कुछ बदलाव की उम्मीद जताई है।
उन्होंने कहा कि तथ्यों से सच्चाई का पता लगाने के लिए चीन के नए नेतृत्व को ‘कॉमन सेंस’ का इस्तेमाल करना चाहिए। रविवार को न्यूयॉर्क में उन्होंने ‘अहिंसा के गुण’ विषय पर सैकड़ों लोगों को संबोधित किया।
दलाई लामा ने जोर देकर कहा कि तिब्बती लोग चीन से स्वतंत्रता की मांग नहीं कर रहे बल्कि वास्तविक स्वायत्तता चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ही मौका मिलेगा वह इस बारे में चीन की सरकार से बात करेंगे।
हॉलीवुड अभिनेता रिचर्ड गेरे की संस्था ने इस कार्यक्रम का आयोजन किया था। तिब्बती धर्मगुरु (78) ने कहा कि तिब्बत की स्वायत्तता से तिब्बतियों और चीनियों दोनों को लाभ होगा।
उन्होंने साफ कहा कि वह अलग तिब्बत नहीं चाहते बल्कि चीन के अधीन स्वायत्तता की बात कर रहे हैं। तिब्बती स्वायत्तता के अपने मॉडल का जिक्र करते हुए उन्होंने हांगकांग को मिली राजनीतिक एवं आर्थिक स्वायत्तता की भी बात की।
दलाई लामा ने कहा, ‘हम आधुनिक तिब्बत चाहते हैं, हमें ऐसी सार्थक स्वायत्तता चाहिए जिससे हम तिब्बती संस्कृति, भाषा और परंपरा का संरक्षण कर सकें। तिब्बत-बौद्ध संस्कृति चीनी बौद्धों के भी हित में है। इससे न सिर्फ तिब्बतियों का बल्कि चीन, भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश का भी हित जुड़ा है।'