नेपाल के रास्ते कैलास मानसरोवर यात्रा की योजना बना रहे यात्रियों को अब
अपनी योजना में बदलाव करना पडे़गा क्योंकि चीन ने हाल ही में नेपाल में आए
भीषण भूकंप की वजह से नेपाल से सटी तिब्बत सीमा को बंद कर दिया है।
चीन के
इस कदम से मानसरोवर जाने वाले तकरीबन 25,000 विदेशी पर्यटक प्रभावित
होंगे, इनमें से ज्यादातर भारतीय हैं। नेपाल के पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने विदेश मंत्रालय से चीनी
अधिकारियों के समक्ष इस मुद्दे को उठाने को कहा है।
नेपाल ने कहा है कि
भूकंप की त्रासदी के बाद से उसके यहां के पर्यटन पर बुरा असर पड़ा है। अगर
नेपाल के रास्ते 25,000 विदेशी कैलास मानसरोवर जाते तो उसे इस समय फायदा
पहुंचता।
चीन ने बताई वजह
इनमें भारतीय, रूसी, मलयेशियाई और यूरोपीय पर्यटक हैं। इन लोगों ने
मानसरोवर जाने के लिए नेपाल की 38 टूर एंड ट्रैवल कंपनियों के जरिए बुकिंग
कराई थी।
चीन ने नेपाल के सीमावर्ती तातोपानी, रासुआ और अन्य जगहों से होकर गुजरने
वाले रास्तों को बंद कर दिया है। उसका कहना है कि इन जगहों पर भूस्खलन हो
सकता है, जिस वजह से यात्रा में दिक्कत आएगी।
वहीं, नेपाल के ट्रैवल
ऑपरेटरों का कहना है कि सरकार कैलास मानसरोवर जाने के लिए पश्चिमी नेपाल के
नेपालगंज-सुरखेत से हेलीकॉप्टर के जरिए या पैदल जाने की मंजूरी दे।
80 फीसदी पर्यटक होते हैं भारतीय
कैलास
टूर एसोसिएशन के चेयरमैन प्रकाश श्रेष्ठ का कहना है कि फिलहाल अभी तक किसी
पर्यटक ने अपनी बुकिंग रद्द नहीं कराई है। पर्यटन कंपनियां मांग कर रही है
कि हुमला जिले में हिल्सा प्वाइंट को खोलकर पर्यटकों को वहां से जाने की
मंजूरी देनी चाहिए।
हर साल कैलास मानसरोवर जाने वालों में से करीब 80 फीसदी भारतीय होते हैं और इनमें से 40,000 नेपाल से होकर यह यात्रा करते हैं।