दुनिया में सबसे ज्यादा कार्बन का उत्सर्जन करने वाले चीन ने अपनी जनता को पर्यावरण प्रदूषण के प्रति आगाह करने के लिए भारत के मुंबई और इलाहाबाद शहर का उदाहरण पेश किया है।
भारत का मजाक उड़ाते हुए चीन ने इन विज्ञापनों में भारत के शहरों में प्लास्टिक कूड़े और रेतीली तूफान की समस्या को उजागर किया गया है। साथ ही पर्यावरण प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए सुझाव भी दिया है।
भारत के मुंबई और इलाहाबाद शहर में पर्यावरण प्रदूषण की समस्याओं को दर्शाने वाले विज्ञापनों को चीन के वांगफुजिंग सिटी सेंटर इलाके में सार्वजनिक स्थानों पर लगाया गया है।
‘गंगा बचाव’ अभियान का भी जिक्र
अंग्रेजी और चीनी भाषा में लिखे इन विज्ञापनों में पर्यावरण प्रदूषण के दुष्परिणामों को दिखाया गया है। साथ ही इसमें कार्बन उत्सर्जन में कटौती करने और अर्थव्यवस्था पर इसके दुष्परिणामों के प्रभाव को कम करने के लिए प्रेरित किया गया है।
एक विज्ञापन में इलाहाबाद में आए 12 जुलाई के रेतीले तूफान को दिखाया गया है, जिसके चलते रेत की वजह से लोग अपने आसपास के लोगों को भी नहीं देख पा रहे हैं। इसमें संदेश दर्शाया गया है कि ‘गंगा बचाव’ अभियान के तहत नारे लगा रहे चार लोग भीषण रेतीले तूफान से जूझ रहे हैं।
इससे पहले हिंद महासागर पर दी थी चेतावनी
इससे पहले चीन ने भारत को चेतावनी देते हुए कहा था कि वह हिंद महासागर को अपनी जागीर समझना छोड़ दे अन्यथा उसे टकराव का सामना करना पड़ सकता है।
भारतीय मीडिया के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के दौरान चीनी सैन्य विशेषज्ञों ने एक सुर में यह बात कही। पिछले साल कोलंबो के बाद हाल ही में कराची बंदरगाह पर चीनी पनडुब्बियों की मौजूदगी को लेकर भारत की आपत्तियों के मद्देनजर चीन के इस रुख को अच्छा संकेत नहीं माना जा रहा है।
हालांकि चीनी सेना के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने रणनीतिक रूप से अहम माने जाने वाले हिंद महासागर में स्थिरता बनाए रखने में भारत की बड़ी भूमिका को स्वीकार किया।