पूर्वोत्तर राज्यों पर खास ध्यान दे रहे नरेंद्र मोदी ने जब अरुणाचल प्रदेश में चुनावी रैली को संबोधित किया, तो जाहिर है दिल्ली में वहीं एक एक युवक की हत्या का मामला जोरशोर से उठाया।
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असम में बोले, तो बांग्लादेशी घुसपैठियों पर निशाना लगाया और यहां तक कह दिया कि अगर सत्ता में आए, तो इन पर लगाम कसी जाएगी। जो जहां से आया है, उसे वहीं भेज दिया जाएगा।
लेकिन जिस एक बात ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं, वो अरुणाचल की बात है। उन्होंने चीन को चुनौती देते हुए कहा कि उसे अपना रुख बदलना होगा, क्योंकि अरुणाचल प्रदेश, भारत का अभिन्न हिस्सा है और आगे भी रहेगा। इंतजार था कि चीन मोदी की 'ललकार' पर क्या कहेगा और क्या वह मोदी के बयान पर जवाब भी देगा। आखिरकार, चीन की वो प्रतिक्रिया आ गई है।
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मोदी ने उठाया था अरुणाचल का मामला
चीन के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को देश का अगला पीएम बनने की रेस में शामिल नरेंद्र मोदी की उन टिप्पणी को जरूरत से ज्यादा तरजीह नहीं दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि अरुणाचल प्रदेश, हिंदुस्तान का अटूट हिस्सा है।
हिमालय के पूर्वी छोर पर भारत और पाकिस्तान के बीच सरहद को लेकर 1962 में तनाव हो गया है। अक्टूबर में परमाणु ताकत रखने वाले दोनों मुल्कों के बीच एक करार पर दस्तखत हुए थे, जिसमें इस बात की कोशिश हुई कि सरहद पर मतभेद किसी टकराव की वजह न बनें।
अरुणाचल प्रदेश में नियमित रूप से चुनाव होते हैं और वह कई दशकों से भारत का अटूट हिस्सा है। हालांकि, चीन इस क्षेत्र पर सवाल उठाता है और उसके मुताबिक भारत का यह हिस्सा दक्षिणी तिब्बत है।
चीन ने दिया जवाब, लेकिन संयम से
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनचिंग से जब नरेंद्र मोदी की टिप्पणी के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा कि चीन अपने पड़ोसी मुल्कों से दोस्ताना संबंध चाहता है। और सभी विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाना चाहता है।
उन्होंने न्यूज ब्रीफिंग में कहा, "चीन-भारत सीमा एक ऐसा मुद्दा है, जो इतिहास में पहले से चला आ रहा है। यह काफी जटिल और संवेदनशील मुद्दा है। इसे बातचीत के एक या दो दौर से नहीं सुलझाया जा सकता।"
हुआ ने कहा, "महत्वपूर्ण यह है कि चीन और भाजपा ने कई बार बातचीत, विचार-विमर्श और सलाह के जरिए विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता और इच्छा जाहिर की है।"
'शांति के लिए काम करें दोनों मुल्क'
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा कि अंतिम समाधान तक पहुंचने से पहले दोनों पक्षों को सीमा पर शांति और सौहार्द्र बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, "इतने साल से दोनों पक्षों के बीच कोई गोलीबारी नहीं हुई है, जिससे यह साबित होता है कि भारत और चीन सरहद पर शांति और सौहार्द्र कायम रखना चाहते हैं।"
मई में होने वाले लोकसभा चुनावों में भाजपा और उसकी अगुवाई में एनडीए के सबसे आगे निकलने की संभावना जताई जा रही है और मोदी पीएम बनने की रेस में शामिल है, ऐसे में चीन का मोदी के बयान पर टिप्पणी देना अहम हो जाता है।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी पिछले साल नवंबर में अरुणाचल प्रदेश को भारत का अभिन्न हिस्सा बता चुके हैं, जिसके बाद मामला कुछ गर्म हो गया था। चीन ने भारत से आग्रह किया था कि सीमा को लेकर इस तरह की समस्याएं नहीं बढ़ाई जानी चाहिए।
एशिया के दो दिग्गज मुल्कों के बीच जटिल रिश्ते रहे हैं। सरहद को लेकर जहां तल्खी रहती है, वहीं कारोबारी मोर्चे पर दोनों एक-दूसरे के बाजारों से फायदा उठाते हैं। इस फायदे में चीन की हिस्सेदारी ज्यादा है।
पिछले साल मई में चीन के सुरक्षाबल भारतीय क्षेत्र में 10 किलोमीटर तक घुस आए थे, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तल्खी पैदा हुई। तब कहा गया था कि भारत को अपने मजबूत पड़ोसी के सामने खड़ा होना चाहिए।