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लखवी मुद्दे पर पीएम ने की चीन के शीर्ष नेतृत्व से बात

Wed, 24 Jun 2015 12:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी
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मुंबई पर हुए 26/11 आतंकी हमले के मास्टरमाइंड और लश्कर-ए-ताइबा कमांडर जकी-उर-रहमान लखवी को रिहा किए जाने को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में कार्रवाई की भारत की कोशिशों पर चीन ने अड़ंगा लगा दिया है।
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इससे खफा भारत ने चीन के साथ इस मसले को शीर्ष स्तर पर उठाया। खुद प्रधानमंत्री मोदी ने शीर्ष चीनी नेतृत्व से बातचीत की।
लखवी को छोड़े जाने को वैश्विक नियमों का उल्लंघन बताते हुए भारत ने संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध समिति से पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

भारत का कहना था कि पाकिस्तान से इस बात का स्पष्टीकरण मांगा जाना चाहिए कि लखवी को रिहा क्यों किया गया। हालांकि चीन के प्रतिनिधियों ने इस आधार पर अड़ंगा लगा दिया कि भारत ने पर्याप्त सूचना उपलब्ध नहीं कराई है।

अमेरिका रुस और फ्रांस ने भी जाहिर की थी चिंता

समिति के वर्तमान प्रमुख जिम मैकले को लिखे पत्र में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि असोक मुखर्जी ने पिछले महीने कहा था कि पाकिस्तानी अदालत द्वारा रिहा किया जाना 1267 संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव का उल्लंघन है। प्रतिबंध संबंधी कदम अल कायदा और लश्कर-ए-ताइबा सहित आतंकवादी संगठन से संबंधित लोगों और इकाइयों पर लागू होते हैं।

समिति में संयुक्त राष्ट्र के पांचों स्थायी सदस्य देश और 10 अस्थायी सदस्य देश होते हैं। लखवी की रिहाई को लेकर अमेरिका, रूस, फ्रांस और जर्मनी ने भी अपनी चिंता जाहिर की थी और इन देशों ने फिर से उसकी गिरफ्तारी की मांग की थी।

 विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत ने यह मामला संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति और चीन दोनों के साथ उच्च स्तर पर उठाया है। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने खुद इस मसले पर चीन के नेतृत्व से बातचीत की। सूत्र के मुताबिक, चीन के छोड़कर अमेरिका, फ्रांस समेत संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति के अन्य सदस्य देशों ने भारत के रुख का समर्थन किया।

चीन से उच्च स्तर पर उठाया गया मसला

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने बताया कि भारत से सभी देशों से अलग अलग बात की, जबकि चीन के साथ यह मसला उच्च स्तर पर उठाया गया। साथ ही प्रतिबंध कमेटी के प्रमुख के सामने भी यह मुद्दा उठाया गया।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध सूची में दाउद को वर्ष 2003 में, सईद को वर्ष 2008 में और लखवी को वर्ष 2008 में डाला गया था। लखवी लश्कर-ए-ताइबा और जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद का करीबी रिश्तेदार है। मुंबई हमले में 166 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे।

लखवी पर पाक अदालत में जारी है मुकदमा

मुंबई पर हुए 26/11 आतंकी हमले के आरोप में 55 वर्षीय लखवी को दिसंबर 2008 में गिरफ्तार किया गया। 25 नवंबर 2009 को छह अन्य लोगों के साथ उसे इन हमलों में आरोपित किया गया। गिरफ्तारी के बाद से लखवी जेल में ही था, लेकिन नौ अप्रैल को एक स्थानीय अदालत के आदेश के बाद उसे रिहा कर दिया गया था।

फिलहाल लखवी के खिलाफ पाक की आतंकवाद निरोधक अदालत में मुकदमा जारी है। लखवी के खिलाफ ज्यादातर सबूत मुंबई आतंकी हमले में जीवित पकड़े गए एकमात्र आतंकी अजमल कसाब ने उपलब्ध कराए थे। उसने माना था कि लखवी और हाफिज सईद ने उसे भर्ती की किया था।

आईएसआई की मदद बिना यह हमला संभव नहीं होता। भारतीय खुफिया विभाग ने लखवी को कराची स्थित लश्कर-ए-ताइबा के नियंत्रण कक्ष से आतंकवादियों को निर्देश देने संबंधी बातचीत की रिकॉर्डिंग भी सबूत के तौर पर दी।
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इसलिए पाक अदालत ने दिया रिहाई के आदेश

पाकिस्तानी अदालत ने पर्याप्त सबूत के अभाव का हवाला देते हुए लखवी की रिहाई के आदेश दिए थे। भारत के दबाव में लखवी को लोक व्यवस्था बनाए रखने संबंधी आदेश के तहत हिरासत में लिया गया था।

पर पाक अदालत ने इस मामले में भी सबूत नाकाफी होने पर लखवी को रिहा कर दिया था। इस पर भारत ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। उसका कहना था कि पाकिस्तान सरकार ने लखवी के खिलाफ लचर पैरवी की।
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