‘साहब! हमारे मां-बाप को दंगाइयों ने मार दिया। बहन को जिंदा जला दिया’। धामपुर से भाग कर आए पांचवीं क्लास के दो बच्चों की कहानी सुनकर जीआरपी पुलिस के होश फाख्ता हो गए।
पुलिस ने धामपुर पुलिस से संपर्क साधा तो गांव में ऐसी कोई वारदात नहीं हुई थी। जबकि असलियत यह थी कि बच्चों पर किराए पर साइकिल देने वाले की उधारी चढ़ गई थी।
जीआरपी थानाध्यक्ष जवाहर सिंह राठौर ने बताया कि रविवार रात धामपुर (बिजनौर) से भाग कर दो बच्चे रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। दोनों को भूख लगी तो एक भगवाधारी महिला के पास पहुंचकर दंगे में अपने परिजनों के मारे जाने की कहानी रच दी।
बच्चों की बात सुनकर महिला तुरंत उन्हें जीआरपी पुलिस के पास लेकर पहुंची। बच्चों ने पुलिस को भी अपने माता-पिता और बहन को मारने की बात बताई। पुलिस ने तुरंत धामपुर पुलिस से संपर्क किया और हालात जाने। लेकिन, सुभाषपुर में ऐसी कोई वारदात नहीं हुई थी।
चैन की सांस लेने के बाद पुलिस ने बच्चों से कड़ाई से पूछताछ की तो उन्होंने सच उगल दिया।
बच्चों ने बताया स्कूल से गायब होकर वे किराए पर साइकिल चलाया करते थे। पांच-छह दिन किराया दिया उसके बाद उधारी से साइकिल चलाने लगे। दो दिन का किराया चढ़ने पर साइकिल वाले ने पैसे मांगे। पैसे न देने पर घर तक बात बताने की बात कही। इससे दोनों घबरा गए और भाग आए। और यहां झूठी कहानी रच डाली।
पुलिस ने दोनों बच्चों को सूचना पर पहुंचे परिजनों के सुपुर्द कर दिया है।