बेटे की चाह में निष्ठ़ुर मां ने अपनी कोख में पल रहे जिस शिशु को लड़की समझकर मार डाला वह लड़का निकला। इस बात की जानकारी मां को गर्भपात के बाद मिली। मामले में एक और शर्मनाक पहलू यह है कि जिस नर्स ने लड़ा या लड़की होने की बात बताने के लिए 30 हजार रुपये लिए थे उसी ने धोखा दिया।
नर्स ने पांच हजार रुपये और कमाने के लोभ के चलते न केवल महिला को झूठी सूचना दी बल्कि गर्भपात के लिए उकसाया था। उसने जानबूझ कर भ्रूण को लड़के की जगह लड़की बताया। इसके बाद उसने गर्भपात के लिए कुछ गोलियां दीं जिसके लिए 1500 रुपये लिए। बाद में गर्भपात के लिए 3500 रुपये और लिए। मतलब सिर्फ पांच हजार रुपये की अतिरिक्त कमाई की खातिर रजनी ने झूठ बोल दिया।
मामले का खुलासा तब हुआ जब मां ने खुद जनसुनवाई में इंदौर के कलेक्टर को इसकी शिकायत की। शिकायत पर कलेक्टर ने जांच बैठा दी है। आरोपी मां ने बताया कि गर्भ ठहरने के बाद जांच के दौरान उसका लाल अस्पताल की नर्स रजनी फ्रांसिस से परिचय हुआ था। पांचवें महीने में चेकअप के दौरान हमने लड़के की इच्छा जताई। जिस पर रजनी ने 30 हजार में सोनोग्राफी करवाने की बात कही।
संगम नगर के डॉक्टर सातलकर क्लीनिक में सोनाग्राफी करवाई गई। रजनी ने इसके बाद गर्भ में लड़की होने की बात कही। इसके बाद गर्भपात के लिए कुछ गोलियां खाने के लिए भी दीं। कुछ दिनों बाद पेट में दर्द उठा तो रजनी ने ही आस्था अस्पताल में भर्ती कराया। यहां गर्भपात के बाद भ्रूण को देखा तो वह लड़का था।