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'लाओ बंदूक, मैं करूंगी इंसाफ, अपने बेटे का बदला लूंगी'

Thu, 12 Feb 2015 01:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ में मुंह में जख्म होने पर ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकों की लापरवाही से मासूम की जान चली गई। इससे क्षुब्ध परिजनों ने डॉक्टरों के खिलाफ जमकर हंगामा किया। चिकित्सक पर ज्यादा एनस्थिसिया देने का आरोप लगाया। पुलिस ने लोगों को समझाकर शांत किया। बच्चे के पिता की तहरीर पर दो डाक्टरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।
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मंगलवार शाम ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र स्थित इंदिरानगर निवासी स्पर्श शर्मा के बेटे आदित्य (4) के मुंह के भीतर तलवे में प्लास्टिक का पाइप लग गया था। इससे मुंह में जख्म हो गया। स्पर्श और उनकी पत्नी कविता ने बेटे आदित्य को छीपी टैंक के पास डॉक्टर क्षीतिज चराया के अस्पताल एक्सेल ईएनटी सेंटर में दिखाया तो कहा गया कि ऑपरेशन करना होगा। इससे बुधवार सुबह आठ बजे स्पर्श शर्मा ऑपरेशन कराने के लिए बेटे को लेकर अस्पताल पहुंचे।

डॉ. क्षितिज ने डॉ. प्रमोद गर्ग को बुलाकर एनस्थिसिया लगवाया। फिर ऑपरेशन कर दिया। इसके बाद परिजनों से कहा कि दो घंटे में बच्चा होश में आ जाएगा। परिजन इंतजार करते रहे, लेकिन बच्चा होश में नहीं आया। इस पर डाक्टर ने कह दिया कि इंफेक्शन हो गया है, जिस कारण आईसीयू में भर्ती कराना होगा। इसके बाद बच्चे को लेकर परिजन नाला कचहरी रोड स्थित सपा एमएलसी सरोजिनी अग्रवाल के दयानंद नर्सिंग होम पहुंचे। वहां भी डाक्टरों ने बच्चे का इलाज शुरू कराया, लेकिन उसे होश नहीं आया। बाद में डाक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। इस पर परिजनों ने दयानंद अस्पताल में ही हंगामा शुरू कर दिया। पिता स्पर्श और मां कविता का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। इस दौरान परिजनों ने चिकित्सक पर ज्यादा एनस्थिसिया देने का आरोप लगाया।
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हंगामा बढ़ने पर लालकुर्ती पुलिस पहुंची। लगभग दो घंटे पुलिस ने समझा-बुझाकर लोगों को शांत किया। एसओ लालकुर्ती विजय सिंह ने बताया कि बच्चे के पिता स्पर्श शर्मा की तहरीर पर डॉ. क्षितिज चराया और डॉ. प्रमोद गर्ग के खिलाफ इलाज में लापरवाही बरतने के कारण बच्चे की मौत होने का केस दर्ज कराया गया है। पोस्टमार्टम कराकर बच्चे का शव परिजनों को सौंप दिया गया। मामले की विवेचना की जा रही है।
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लाओ बंदूक दो, मैं करूंगी इंसाफ

बुधवार दोपहर दयानंद अस्पताल में जब आदित्य को मृत घोषित कर दिया गया, तो उसकी मां कविता फूट फूटकर रोने लगी। कभी गुस्से में चिल्लाती, तो जमीन पर गिर पड़ती। इसी बीच कविता ने वहां खड़े सिपाही की रायफल पकड़ ली और बोली कि लाओ बंदूक, मैं अपने बेटे की मौत का बदला लूंगी। परिवार के लोगों ने बमुश्किल कविता को संभाला।

आठ हजार रुपये जमा कराए
आदित्य का ऑपरेशन करने के लिए डॉ. क्षितिज चराया ने आठ हजार रुपये जमा करा लिए थे। दवाओं का खर्च अलग से लिया गया। आदित्य के पिता स्पर्श शर्मा ने बताया कि हमें डाक्टर ने कहा था कि चोट मामूली है, जल्द ठीक हो जाएगी। बावजूद इसके डाक्टर ने इतनी बड़ी लापरवाही कर दी। वहीं, दयानंद अस्पताल में ले जाने पर करीब 20 हजार रुपये जमा कराए गए। वहीं, सपा नेता डाक्टर राजेश सिंह भी अस्पताल पहुंच गए थे। उन्होंने कहा कि यहां जमा कराए गए रुपये परिजनों को लौटा दिए जाएंगे।

डाक्टर क्षितिज की सफाई
डॉ. क्षितिज चराया का कहना है कि एनस्थिसिया डॉक्टर प्रमोद गर्ग से लगवाया गया था। 10 से 15 मिनट में ही ऑपरेशन हो गया और तीन से चार टांके लगे थे। ऑपरेशन में कोई गलती नहीं की गई, बल्कि एनस्थिसिया के कारण रिएक्शन हुआ, जो बहुत कम मरीजों में होता है। एनस्थिसिया कॉम्प्लीकेशन के कारण बच्चे की हृदय गति रुक गई।
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