लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सात सीट पर तीन लाल अपने माता-पिता की विरासत संभालने की जंग लड़ेंगे।
कांग्रेस ने बेशक अभी सीटें घोषित नहीं की हैं लेकिन पूर्वी दिल्ली से अघोषित प्रत्याशी संदीप दीक्षित को मां शीला दीक्षित का रुतबा कायम रखना है तो पश्चिम दिल्ली से भाजपा प्रत्याशी प्रवेश वर्मा को पिता साहिब सिंह वर्मा को संसद में प्रवेश करके पुष्पांजलि देनी है।
ये दोनों युवा प्रत्याशी पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री व वर्तमान में केरल की राज्यपाल शीला दीक्षित और पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा संसद का भी प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
प्रवेश संभालेंगे दिल्ली की विरासत
पूर्वी दिल्ली से सांसद संदीप दीक्षित अपना तीसरा संसदीय चुनाव लड़ेंगे तो प्रवेश वर्मा विधानसभा चुनाव जीतने के बाद पहली बार लोकसभा चुनाव में बाहरी दिल्ली को समेटने वाली पश्चिम दिल्ली से मैदान में हैं।
बाहरी दिल्ली से ही साहिब सिंह वर्मा सांसद बने थे जिनकी सड़क हादसे में मौत हो गई थी। 2009 के चुनाव में टिकट मांगा था लेकिन नहीं मिला। फिर 2013 में विधानसभा टिकट मिला और जीत दर्ज कर ली।
अब जाट ये दिल्ली के शिक्षा मंत्री व मुख्यमंत्री रहते इस क्षेत्र के लिए किए कार्यों का हवाला देकर वोट मांगेंगे। पूर्वी दिल्ली से सांसद संदीप दीक्षित का राजनीतिक करियर सीधे संसद से शुरू हुआ। मां शीला दीक्षित दिल्ली की मुख्यमंत्री थीं।
जेपी भी संभालेंगे मोर्चा!
इससे पहले यूपी के कन्नौज सीट से सांसद भी रही हैं। दिल्ली के 15 साल के मुख्यमंत्री कार्यकाल में किए गए कार्यों का हवाला देकर वोट मांगेंगे।
दिल्ली से शीला दीक्षित की रवानगी के बाद यहां संदीप के लिए पैर जमाए रखने की चुनौती जरूर है। इन दोनो पूर्व मुख्यमंत्री के लाल की जीत विरासत को आगे बढ़ाएगी।
उत्तर पूर्वी दिल्ली से प्राइमरी प्रक्रिया से घोषित कांग्रेस प्रत्याशी जेपी अग्रवाल के पिता रामचरण अग्रवाल 1948 में दिल्ली के पहले उपमहापौर रहे हैं। इनका पंडित जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी से अच्छे संबंध थे।
जेपी अग्रवाल लोकसभा के अलावा राज्यसभा से भी संसद का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। दिल्ली के अकेले सांसद हैं जो पांच बार सांसद रहे हैं। इससे पूर्व जेपी अग्रवाल पार्षद व उपमहापौर भी रहे हैं।