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छत्तीसगढ़ में मरने वाली महिलाओं की संख्या हुई 14

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छत्तीसगढ़ में नसबंदी शिविरों में महिलाओं की मौत का मामला और ज्यादा गंभीर हो गया है। अब तक मृतकों की संख्या 14 तक पहुंच गई है। बिलासपुर के अलावा पेंड्रा के नसबंदी शिविर में भी महिलाओं की मौतों का मामला सामने आया है।
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पेंड्रा के शिविर में संरक्षित बैगा जनजाति की दो महिलाओं का आपरेशन करने का भी मामला सामने आया, जिनकी नसबंदी कलेक्टर की अनुमति के बगैर नहीं की जाती है। बैगा महिलाओं में से एक की मौत हो गई है।

अब तक प्रारंभिक तौर पर सेप्टीसीमिया के कारण कई अंगों के काम बंद करने (मल्टी आर्गन फेलुअर) को मौत का कारण माना जा रहा है। वहीं सरकारी हलकों में सिप्रोप्रोक्सिन-500 जैसी कुछ दवाओं को जिम्मेदार बताया जा रहा है।
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मानवाधिकार आयोग ने जारी किया नोटिस

बिलासपुर और पेंड्रा के नसबंदी शिविरों में आपरेशन कराने वाली 14 महिलाओं की मौत का आंकड़ा अब तक सामने आ रहा है। बिलासपुर शिविर में आपरेशन कराने वाली महिला की मौत की पुष्टि प्रशासन नहीं कर रहा है।

पेंड्रा नसबंदी शिविर की सात महिलाओं को गंभीर हालत में बिलासपुर में छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (सिम्स) में भर्ती कराना पड़ा। इसमें से एक बैगा महिला की मौत भी हो गई है।

पेंड्रा नसबंदी शिविरों से प्रभावित सात महिलाओं को सिम्स में भर्ती कराया गया था। स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल ने इस्तीफे की किसी भी संभावना से इनकार कर दिया है।

इस बीच छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सरकार को नोटिस जारी किया और पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। वहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का नोटिस राज्य सरकार को जारी होने के बाद सरकारी हलकों में खासी चिंताएं देखी जा रही हैं।

प्रभावी रहा कांग्रेस का बंद

डॉ. डीडी नाग सीएमओ जगदलपुर ने भी पुष्टि की है कि वहां भी नसबंदी शिविर में आपरेशन कराने वाली महिलाओं की हालत बिगड़ी थी। मुख्यमंत्री रमनसिंह के निवास पर आज बैठकों का दौर चलता रहा।

अखिल भारतीय. आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली से मेडिकल विशेषज्ञों की टीम ने आज घटनास्थलों का दौरा किया और सिम्स, अपोलो व किम्स केयर में भर्ती प्रभावितों की स्थिति का जायजा लिया।

एम्स की टीम के प्रमुख डॉ. रंजन त्रिखा ने कहा कि वह पूरी स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं और पहली प्राथमिकता यह है कि ज्यादा संख्या में मौतें न हों। उन्होंने कहा कि अभी दी जा रही दवाईयों की गुणवत्ता ठीक पाई गई है और मौत के कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा।

कांग्रेस ने पूरे छत्तीसगढ़ में बंद का आयोजन किया था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल और नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव के नेतृत्व में आयोजित किया गया बंद प्रभावी रहा। लोगों ने अपने कार्यालय और प्रतिष्ठान बंद रखे। रायपुर में कांग्रेस के नेता विकास उपाध्याय को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
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राज्य सरकार को मोदी का डर

स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल जिस तरह से पूरे मामले से पल्ला झाड़ रहे हैं, सरकार के तौर तरीकों पर सवाल खड़े हुए हैं। अमर अग्रवाल ने स्पष्ट कहा है कि इस्तीफे का कोई प्रश्न नहीं है। मुख्यमंत्री और संगठन इस बारे में निर्णय लेंगे।

बैगा आदिवासी महिला की मौत की बात को वह लगातार नकारते रहे कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। मुख्यमंत्री रमनसिंह ने भी मंगलवार को कहा था कि स्वास्थ्य मंत्री कोई आपरेशन नहीं करने जाता है।

राज्य सरकार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डर साफ नजर आ रहा है। एम्स की टीम से मुख्यमंत्री रमनसिंह ने खुद बैठक करके पूरी स्थिति की जानकारी ली है। लेकिन जिस तरह से मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है और दूसरे शिविरों के प्रभावितों को भी अस्पताल लाया जा रहा है, उससे सरकार पर बड़ा नैतिक दबाव है। राज्य में नगरीय निकायों के चुनाव सिर पर हैं। कांग्रेस इस मौके को किसी तरह हाथ से नहीं जाने देना चाहती।
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