बांबे हाईकोर्ट ने आदर्श घोटाले के आरोपियों में से महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण का नाम हटाने की सीबीआई की अपील खारिज करते हुए उनके खिलाफ मुकदमा चलाने का रास्ता साफ कर दिया है।
हालांकि, अदालत ने अपने फैसले को चार सप्ताह तक क्रियान्वित नहीं करने को कहा है, जिससे कि जांच एजेंसी इस मामले में ऊपरी अदालत में अपील कर सके।
हाईकोर्ट के जज जस्टिस एमएल तहिलयानी ने कहा कि वह मामले को खारिज करते हैं। यह फैसला वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनाया गया, क्योंकि जस्टिस तहिलयानी हाईकोर्ट के नागपुर पीठ में एक मामले की सुनवाई कर रहे थे।
अदालत के फैसले के बाद सीबीआई के वकील हितेन वेनेगांवकर ने फैसले के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की मांग की, जिससे कि ऊपरी अदालत में अपील की जा सके। अदालत ने उनकी मांग स्वीकार कर ली।
सीबीआई महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल के शंकरनारायण से चव्हाण के खिलाफ मामला चलाने की अनुमति नहीं मिलने के कारण आरोपियों की सूची से उनका नाम हटवाना चाहती है। आदर्श घोटाले में जिन 13 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया है उसमें चव्हाण का भी नाम शामिल है।