छत्तीसगढ़ भी तीसरी बार चुनावी मैदान में है और मुख्यमंत्री रमन सिंह भी। 2000 में राज्य बनने के बाद छत्तीसगढ़ में ये तीसरा विधानसभा चुनाव है। भाजपा पिछले दो विधानसभा चुनावो में वहां क्रांग्रेस को हरा चुकी है। मुख्यमंत्री रमन सिंह को तीसरी बार भी जीत का भरोसा है।
रमन सिंह के सामने माओवादी हमले में शीर्ष नेतृत्व के अधिकांश नेताओं को गंवा देने के बाद बिखरी हुई और गुटबाजी की शिकार कांग्रेस है, इसलिए ये भरोस सच भी साबित हो सकता है।
चुनावी मैदान में रमन सिंह
रमन सिंह ने भाजपा के पुराने चेहरे भारतीय जनसंघ से अपनी राजनीति की शुरुआत की। वे पहली बार मध्यप्रदेश विधान सभा के लिए 1990 में चुने गए थे। 1998 में उन्होंने दोबारा विधानसभा चुनाव जीता।
1999 में राजनांदगांव सीट से लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद उन्होंने केंद्रीय राजनीति की ओर रुख कर लिया।
वे अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री भी रहे। 2003 में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। पार्टी ने उन्हीं के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
खाद्य सुरक्षा योजनाओं के चलते 2008 के चुनावों में भी रमन सिंह ने कामयाबी हासिल की। 2013 में भी पार्टी इन्हीं के नेतृत्व मे एक बार फिर मैदान में है।