आने वाले लोकसभा चुनाव में पार्टी को मजबूत करने के लिए संगठन में फेरबदल पर ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के पदाधिकारियों ने गेंद अब सोनिया गांधी व राहुल गांधी के पाले में डाल दी है।
राहुल गांधी ने एआईसीसी पदाधिकारियों के साथ संगठन में फेरबदल पर सोमवार को एक बार फिर बात कर इस कसरत को लगभग पूरा कर लिया है। अब अंतिम फैसला कांग्रेस अध्यक्ष व उपाध्यक्ष को मिलकर लेना है।
राहुल के साथ बैठक में सोमवार को 29 के करीब पदाधिकारी मौजूद रहे। इनमें से 14 ने राहुल के समक्ष संगठन की मजबूती और फेरबदल पर अपनी राय रखी। राहुल ने इन सभी की बात तो सुन ली है, लेकिन अब तक अपना फैसला नहीं सुनाया है।
पार्टी महासचिव जनार्दन द्विवेदी के मुताबिक राहुल ने सिर्फ प्रदेश या राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं बल्कि जिला व ब्लाक स्तर पर कार्यकर्ताओं से बातचीत करने की इच्छा जताई है। वह निचले स्तर तक पार्टी कार्यकर्ताओं से बात कर जड़ तक जाना चाहते हैं।
दरअसल उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में पार्टी को मिली करारी हार के बाद यह माना गया कि कांग्रेस को राज्य में अपनी जड़ें मजबूत करनी होंगी क्योंकि जिला व ब्लॉक स्तर पर पार्टी का वजूद हिला हुआ है। राहुल इसी थ्योरी पर काम को अंजाम देना चाहते हैं।
वहीं सूत्र यह भी बताते हैं कि राहुल ने बैठक में फिर दोहराया कि वह आपसी गिले शिकवों और फूट को बर्दाश्त नहीं करेंगे। आपसी मनमुटाव को मिलकर सुलझाने की जरूरत है तभी संगठन मजबूती से काम कर सकेगा। चिंतन शिविर में भी राहुल ने कहा था कि कांग्रेस एक परिवार की तरह है। गिले शिकवों को आपस में मिल बैठकर सुलझाना चाहिए।