यूपीए सरकार में फेरबदल पर लंबे समय से जारी सियासी सस्पेंस का पर्दा अब जल्द उठ सकता है। दशहरा बीतने के साथ ही कैबिनेट में फेरबदल कर सरकार का चेहरा चमकाने की चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के दुर्गापूजा समारोहों से लौटने के बाद सियासी गलियारों में रविवार को कैबिनेट में फेरबदल को अमलीजामा पहनाए जाने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
इस फेरबदल में लगभग दर्जन भर नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है। वहीं एक से अधिक महकमों की जिम्मेदारी संभाल रहे केंद्रीय मंत्रियों वीरप्पा मोइली, आनंद शर्मा, वायलार रवि और सीपी जोशी आदि का भार हल्का किया जा सकता है। इस फेरबदल में कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी की टीम के कुछ नए युवा चेहरों को सरकार में शामिल करने से लेकर प्रमोशन दिए जाने की भी पुख्ता संभावनाएं जताई जा रही हैं।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कैबिनेट में फेरबदल को लेकर यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ कम से कम दो बार बीते दिनों लंबी चर्चा कर चुके हैं। मगर पिछले दो हफ्तों में भ्रष्टाचार से जुड़े सामने आए अनेक सियासी मुद्दों की भरमार के कारण फेरबदल का एजेंडा पीछे रह गया था। अब चूंकि नवंबर के तीसरे हफ्ते में संसद का शीत सत्र शुरू होने वाला है। इसीलिए सरकार के पास फेरबदल को अमलीजामा पहनाने के लिए अब ज्यादा वक्त नहीं है।
इस लिहाज से रविवार 28 अक्तूबर को फेरबदल के सस्पेंस से पर्दा उठने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। तृणमूल कांग्रेस के सरकार से हटने के बाद एक कैबिनेट और छह राज्य मंत्रियों के पद खाली हुए हैं। तो इससे पहले दयानिधि मारन, वीरभद्र सिंह के इस्तीफा देने और विलासराव देशमुख के निधन की वजह से तीन कैबिनेट पद रिक्त हुए हैं। प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति बनने की वजह से भी एक कैबिनेट पद खाली हुआ था। सरकार में इन खाली पदों पर नए चेहरों का आना तय माना जा रहा है।
चूंकि कांग्रेस नेतृत्व सरकार में इस फेरबदल को 2014 के लिहाज से अंजाम देना चाहता है। इसीलिए माना जा रहा है कि राहुल गांधी की टीम में शामिल मीनाक्षी नटराजन, माणिक टैगोर, मनीष तिवारी सरीखे सांसदों को सरकार में शामिल किया जा सकता है। तो सरकार में पहले से ही राज्यमंत्री के रूप में शामिल ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद और सचिन पायलट आदि को प्रमोशन देकर स्वतंत्र प्रभार का राज्यमंत्री बनाया जा सकता है।
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को सियासी रूप से चिढ़ाने के लिए कांग्रेस उनकी धुर आलोचक अपनी सांसद दीपा दासमुंशी, अधीर रंजन चौधरी और प्रदीप भट्टाचार्य सरीखे चेहरों को सरकार में शामिल कर सकती है। कैबिनेट के मौजूदा कई मंत्रियों के विभागों में भी फेरबदल की संभावनाओं को नकारा नहीं जा रहा। इस क्रम में गुलाम नबी आजाद, जयपाल रेड्डी और कमलनाथ के विभागों में बदलाव हो सकता है।
सीपी जोशी को बेशक सड़क परिवहन के साथ रेल मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है मगर कांग्रेस के सियासी गलियारों में गुलाम नबी आजाद को रेल महकमा देने की संभावनाएं जताई जा रही है। इस फेरबदल में एनसीपी के अलावा यूपीए के किसी अन्य सियासी घटक की ज्यादा दिलचस्पी नहीं है। एनसीपी ने पहले ही अगाथा संगमा की जगह अपने नेता तारिक अनवर को मंत्री बनाने का यूपीए नेतृत्व को संदेश दे दिया है।