आप 'विक्की डोनर' फिल्म की कहानी के बारे में जानते तो होंगे लेकिन क्या कभी किसी ऐसे भैंसे के बारे में सुना है जो भैंसों का 'विक्की डोनर' हो। भैंसों का यह 'युवराज' मुर्राह नस्ल का है।
भारत में 13 नस्ल के भैंसे पाए जाते हैं जिसमें मुर्राह को सबसे बढ़िया नस्ल माना जाता है। इसका वजन 450 किलो,लंबाई 10 फीट और ऊंचाई पांच फ़ीट आठ इंच है।
युवराज नाम का यह भैंसा हरियाणा के कुरुक्षेत्र में अपने मालिक कर्मवीर सिंह के साथ रहता है। 'युवराज' का नाम भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी युवराज के नाम पर रखा गया है।
भैंसो का ब्रांड है युवराज
कर्मवीर सिंह का कहना है, "हर दिन 'युवराज' को देखने कोई न कोई आता है। वह एक आम भैंस नहीं है। वे एक ब्रांड है।" इसके वीर्य की एक डोज़ की कीमत 350 रुपए है। यह भारत में भैंसे के वीर्य की औसत कीमत से 10 गुणा ज्यादा है। इस हिसाब से इस भैंसे का वीर्य भारत का सबसे महंगा वीर्य है।
भैंसों के ऊपर शोध करने वाले केंद्रीय शोध संस्था के प्रमुख इंद्रजीत सिंह प्रजनन के मामले में युवराज को 'चैंपियन' का दर्जा देते हैं।इसके वीर्य को बेचकर कर्मवीर सिंह हर साल तीन से पांच लाख रुपए कमाते हैं। आमतौर पर एक बार के स्खलन में एक भैंसे के डोज़ में 500-600 शुक्राणु होते हैं लेकिन युवराज के डोज में दो करोड़ शुक्राणु होते हैं।
युवराज को किसी मादा भैंस की मदद से उत्तेजित करके स्खलित करवाया जाता है जिसे एक कृत्रिम योनी में इकट्ठा किया जाता है। कर्मवीर सिंह इसके वीर्य को अपने घर में -196 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर 50 लीटर तरल नाइट्रोजन के कंटेनर में रखते हैं। वीर्य के व्यवसाय से जुड़े लोग कर्मवीर सिंह के घर के बाहर लाइन लगाकर खड़े रहते हैं।
हर बार बनता है विजेता
उत्तर प्रदेश से आए ललित चौधरी बताते हैं, "हम 'युवराज' का वीर्य लेने पहली बार आए हैं। मैंने पहली बार इसे मेरठ के पशु मेले में देखा था। वहां लोग इसके लिए पागल हुए जा रहे थे। मैं उसके वीर्य को पूरे देश के किसानों में बेचना चाहता हूं।" राज्य की ओर से आयोजित मवेशी प्रतियोगिता में 'युवराज' हर बार विजेता बनता है और तीन लाख रुपए कमाता है।
इंद्रजीत सिंह का कहना है, "मैंने आज तक ऐसा स्वस्थ, सुंदर और उपयोगी भैंसा नहीं देखा है।"कई लोग इस भैंसे को खरीदना चाहते हैं। अभी दो साल पहले ही हैदराबाद के एक खरीददार ने सात करोड़ रुपए की पेशकश की थी। लेकिन कर्मवीर सिंह का कहना है, "मैं इसे बेचने के बारे में तभी सोचूंगा जब मुझे इस कीमत से तीन गुणा ज्यादा कीमत मिलेगी, जिससे कि मैं एक हैलिकॉप्टर खरीद सकूं।" लेकिन उसके बाद वे बड़बड़ाते हुए कहते हैं, "लेकिन क्या मुझे उसे उसके परिवार से अलग करना चाहिए। क्या मैं उसके बिना रह पाऊंगा।
"'युवराज' के परिवार में उसकी 19 वर्षीय मां गंगा है जो कि 16वीं बार गर्भ से है। कर्मवीर सिंह गर्व से कहते हैं कि वह हर दिन 26 लीटर दूध देती है।
युवराज की सेहत का राज
युवराज का तीन साल का छोटा भाई भीम है और 16 महीने की बहन सरस्वती भी है। कर्मवीर बताते हैं कि उन्होंने 'युवराज' के पिता को 14 साल पहले रोहतक ज़िले के एक किसान से 37 हजार रुपए में खरीदा था। बाकी कहानी आपके सामने हैं।
कर्मवीर सिंह की देखभाल ने 'युवराज' को वाकई में युवराज बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है। 'युवराज' की दो वक्त की खुराक में 20 लीटर दूध,10 किलो सेब और इतना ही चारा और अनाज शामिल है।
इस पर हर दिन 2000 रुपए का खर्च आता है। शाम को दो नौकर 'युवराज' को चराने के लिए खेत में पांच किलोमीटर तक ले जाते हैं। कर्मवीर सिंह रात में सोने से पहले 'युवराज' को एक बार देखना नहीं भूलते।