इशरत जहां और उसके तीन साथियों के फर्जी एनकाउंटर मामले में सीबीआई की जांच अंतिम चरण में है। लेकिन इशरत की असली पहचान अभी भी जांच एजेंसी के लिए चुनौती बनी हुई है।
सीबीआई यह फैसला नहीं कर पा रही है कि इशरत अपने तीन साथियों के साथ गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या के लिए निकली थी या उसे इस योजना के बारे में कुछ पता नहीं था।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गृह मंत्रालय ने एजेंसी को इस बारे में कोई जल्दबाजी नहीं करने का इशारा कर रखा है।
सीबीआई के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक उसे जांच के दौरान अबतक ऐसा कोई सुराग नहीं मिला है, जिससे इशरत को पक्के तौर पर आतंकवादी करार दिया जाए।
इशरत की असली पहचान के बारे में अमर उजाला की ओर से तीन बार पूछे गए सवाल को गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे टालते आ रहे हैं।
हालांकि सीबीआई ने अपनी जांच के आधार पर पिछले दिनों यह फैसला कर लिया था कि वह इशरत को आतंकवादी नहीं करार देगी।
इशरत मुंबई के मुंब्रा इलाके की रहने वाली 19 साल की लड़की थी, जिसका 15 जून 2008 को गुजरात पुलिस ने अहमदाबाद शहर के बाहर उसके तीन साथियों के साथ एनकाउंटर कर दिया था।
इशरत के तीन साथी जावेद गुलाम शेख, अमजद अली राणा और जीशान जौहर को भी गुजरात पुलिस के डीसीपी डीजी बंजारा की टीम ने अलग-अलग जगहों से पकड़ा था।
पुलिस के मुताबिक यह चारों नरेंद्र मोदी की हत्या के इरादे से मुंबई से अहमदाबाद आ रहे थे। इशरत की मां की अर्जी और गुजरात हाईकोर्ट के आदेश पर पूरे मामले की जांच एसआईटी ने की। यह एनकाउंटर पूरी तरह फर्जी पाया गया।
मामले की जांच सीबीआई को मिली। सीबीआई ने इस मामले की पहली चार्जशीट में कहा है कि एनकाउंटर के बाद इन्हें आतंकवादी साबित करने के लिए एके-57 और ग्रेनेड जैसे हथियार इनकी लाशों के पास रखे गए। यह हथियार स्टेट आईबी ने मुहैया कराए।
एजेंसी जल्द ही दायर होने वाली अतिरिक्त चार्जशीट में दो आईबी अधिकारियों और तत्कालीन गृहराज्य मंत्री अमित शाह का नाम डालने वाली है।
दरअसल इशरत को लेकर संशय तब बना जब यह बात सामने आयी कि अमेरिकी जेल में बंद लश्कर आतंकी डेविड हेडली ने उसे पाक आतंकी संगठन का चुना हुआ सदस्य बताया।
भारतीय एजेंसियों की जांच में हेडली के इस दावे की अब तक कोई तसदीक नहीं हो पाई है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक कुछ अधिकारियों ने जानबूझ कर इशरत को आतंकी करार देने के लिए हेडली के बयान का सहारा लिया।