भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने शनिवार को महिला दिवस के मौके पर दिल्ली में लोगों से ‘चाय पर चर्चा’ कार्यक्रम के दौरान संवाद किया।
मोदी ने विश्व महिला दिवस के अवसर पर देश की महिलाओं को शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम के दौरान नरेंद्र मोदी ने महिलाओं से विभिन्न मुद्दों को लेकर चर्चा की।
मोदी ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि आगामी चुनाव देश का भविष्य तय करेगा। महिलाओं में देश को बदलने की पूरी ताकत है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण की आवश्यकता है।
क्या-क्या कहा मोदी ने?
नरेंद्र मोदी ने महिलाओं के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि हमारा पहला प्रयास होना चाहिए कि देश की सभी महिलाएं शिक्षित हों। यदि देश की महिलाएं शिक्षित होंगी तो देश विकास के नए शिखर छुएगा।
मोदी ने कहा कि गांधी जी कहते थे कि अगर हम एक बेटे को पढ़ाते हैं तो सिर्फ एक व्यक्ति पढ़ता है लेकिन अगर एक बेटी को पढ़ाते हैं तो दो परिवार पढ़ते हैं।
मोदी ने कहा कि बेटी को जन्म लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। बेटियों की शिक्षा के लिए माहौल बनाने की जरूरत है। बेटियों को शिक्षा दिलाना जरूरी है।
महिलाओं के लिए ऑनलाइन शिक्षा के प्रयास हों
महिलाओं से मुखातिब होते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी व्यापक कदम उठाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि हर समस्या का समाधान होता है, जरूरत है केवल इरादे और नीयत की। मोदी ने कहा कि महिलाओं को न्यायिक क्षेत्र में लाने की भी जरूरत है।
मोदी ने कहा कि महिलाओं के लिए ऑनलाइन शिक्षा के प्रयास होने चाहिए। बेटियों के लिए हर स्कूल में टॉयलेट की व्यवस्था होनी बहुत जरूरी है।
केंद्र सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल
महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए यूपीए सरकार ने कुछ नहीं किया। महिलाओं के लिए बनाए गए 1000 करोड़ रुपये के निर्भया फंड का इस्तेमाल तक नहीं हो सका।
यहां तक कि महिलाओं के लिए शुरू की गई 181 हेल्पलाइन तो स्टाफ को वेतन नहीं मिलने के चलते ठप ही हो गई। इससे साफ है कि यूपीए सरकार महिलाओं को लेकर कितनी असंवेदनशील है।
जमीनी स्तर पर व्यापक अधिकार देने की वकालत
एक सवाल के जवाब में मोदी ने कहा कि आजादी के छह दशक के बाद भी देश के सभी स्कूलों में बच्चियों के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं हो सकी है।
इसके कारण लड़कियां स्कूल छोड़ रही हैं। फिर सुरक्षा एक ऐसी समस्या है जिससे महिलाएं रोज ही दो चार हो रही हैं। उन्होंने कहा कि स्थिति बदलने के लिए महिलाओं को जमीनी स्तर पर व्यापक अधिकार देने होंगे।