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दंगे रोकने में अखिलेश सरकार की नीयत पर केंद्र को शक

Fri, 01 Nov 2013 12:57 AM IST
गुंजन कुमार/दिल्ली
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और पुलिस महानिदेशक देवराज नागर ने केंद्र की रिपोर्ट को गंभीरता से लिया होता तो मुजफ्फरनगर के ताजे दंगे पर उन्हें कठघरे में खड़ा नहीं होना पड़ता।
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अगस्त-सितंबर में इसी इलाके में शुरू हुए दंगों के बाद केंद्र ने उत्तर प्रदेश सरकार को साफ तौर पर आगाह किया था कि गांवों में पहुंचे दंगों की आग दूर तक जाएगी।

केंद्र ने यह चेतावनी भी दी थी कि एक गांव के दंगे का बदला दूसरे गांव में लेने का सिलसिला शुरू होने की पूरी आशंका है। केंद्र की यह आशंका सच साबित हुई, जब बुधवार को मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना इलाके में एक बार फिर सांप्रदायिक बदले की आग भड़क उठी।
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मुजफ्फरनगर के ताजा हालात से चिंतित गृह मंत्रालय का मानना है कि राज्य सरकार दंगे रोकने के प्रति अभी भी गंभीर नहीं है। मंत्रालय ने राज्य सरकार से एक बार फिर पूरी रिपोर्ट मांगी है।

यूपी सरकार ने किया नजरअंदाज
अमर उजाला ने 10 सितंबर को उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बीएल जोशी की केंद्र को भेजी गई रिपोर्ट के हवाले से यह खबर प्रकाशित की थी। इस रिपोर्ट के आधार पर ही केंद्र ने अखिलेश सरकार को आगाह किया था कि अगर राज्य प्रशासन ने गंभीर रुख अख्तियार नहीं किया तो दंगे का सिलसिला चार पांच महीने तक जारी रहेगा।

गृह मंत्रालय के सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि राज्य और स्थानीय प्रशासन ने दंगे के इस हद तक फैलने के सभी संकेतों को नजरअंदाज कर दिया।

दंगे रोकने में लगेंगे कई महीने
मुजफ्फरनगर के आसपास करीब तीन हजार गांव हैं, जहां सांप्रदायिक समीकरण काफी जटिल हैं। हरेक गांवों में सेना और पुलिस की तैनाती नामुमकिन है। लिहाजा एक गांव की मौत का बदला दूसरे गांव में लेने का सिलसिला शुरू होने की पूरी आशंका है। यही वजह है कि इस दंगे को रोकने में कई महीने लग जाएंगे।
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