दुर्गा शक्ति नागपाल को निलंबित कर विवाद में फंसी उत्तर प्रदेश की सपा सरकार की परेशानी कम होती नहीं दिख रही है।
अब केंद्रीय पर्यावरण व वन मंत्रालय की ओर से गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट ने यमुना में अवैध खनन के मामले में यूपी सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सपा सरकार के शासनकाल में सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट के दिशा-निर्देश और पर्यावरण व माइनिंग कानूनों की धज्जियां उड़ाकर गौतमबुद्ध नगर में यमुना में अवैध खनन होता रहा है।
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप दी है। इसमें रेत माफिया को लेकर उन सभी आरोपों की पुष्टि की गई है, जिनके खिलाफ आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल लड़ती रही हैं।
दुर्गा को भले ही ग्रेटर नोएडा के एक धार्मिक स्थल की दीवार गिराने के आरोप में निलंबित किया गया हो, लेकिन यह बात जग जाहिर है कि उनके खिलाफ कार्रवाई के पीछे खनन माफिया का हाथ रहा है।
दुर्गा के निलंबन के बाद यमुना में अवैध खनन का मामला उछलने के बाद पर्यावरण मंत्रालय ने 6 अगस्त को कमेटी गठित की थी।
कमेटी ने दो टूक कहा है कि गौतमबुद्ध नगर में यमुना में खनन के मामले में पर्यावरणीय नियमावली, माइनिंग व माइंस (विभाग और नियम) 1957 से लेकर सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए जारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया गया है।
कमेटी में पर्यावरण व वन मंत्रालय के निदेशक डॉ. सरोज, देहरादून स्थित आईबीएम के इंचार्ज व डिप्टी कलेक्टर जीएस मीणा तथा पर्यावरण मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय लखनऊ में तैनात निदेशक डॉ. केके गर्ग तथा प्रदेश के आला अफसर भी शामिल थे।
कमेटी ने हिंडन नदी और यमुना किनारे बसे कई गांवों का दौरा करके रिपोर्ट तैयार की है। कमेटी को यमुना पुल, जुप्पा गांव, मामंथल गांव, गड्डी गांव, कुंडली गांव, यकूतपुर क्षेत्र में अवैध खनन के ठोस सुबूत मिले हैं।
कमेटी की सिफारिशें
पर्यावरण मंत्रालय की जांच कमेटी ने यमुना में अवैध खनन पर लगाम लगाने के लिए कई सिफारिशें की है।
1. सुप्रीम कोर्ट के 27 फरवरी, 2012 को दिए दिशा-निर्देश के तहत सभी राज्यों को छह माह के भीतर माइनिंग व माइंस को रियायत देने के लिए नियम बनाने हैं और अदालत में अपनी रिपोर्ट जमा करनी है।
2. राज्य सरकारों को रेत खनन के लिए नदी के किनारे क्षेत्र विशेष की पहचान करनी चाहिए। माइनिंग की गहराई भी तीन मीटर अथवा जल स्तर में से जो भी कम हो, वहां तक तय करनी चाहिए। सरकार को कुछ सुरक्षा जोन तय करने चाहिए और वहां किसी भी कीमत पर माइनिंग की अनुमति नही देनी चाहिए।
3. उत्तर प्रदेश सरकार को अपने कानून के तहत माइनिंग की अनुमति देने के लिए संबंधित जमीन का खसरा नंबर व अन्य जरूरी मानकों का पालन करना चाहिए।
4. प्रस्ताव करने वाले को माइनिंग का प्रस्ताव तैयार करना चाहिए और उसे प्रदेश सरकार के माइनिंग व भूगर्भ विभाग से मंजूरी लेनी चाहिए।
5. सुप्रीम कोर्ट के 27 फरवरी, 2012 के आदेश के तहत सभी खनन लीज के लिए पर्यावरणीय क्लीयरेंस ली जानी चाहिए। रेत खनन के लिए पर्यावरणीय क्लीयरेंस पाने के लिए कुछ प्रावधान जरूरी होना चाहिए। मसलन, खनन क्षेत्र को लेकर अध्ययन किया जाना चाहिए कि खनन से वहां पर्यावरण व अन्य मामले में क्या असर पड़ेगा।
6. नदी के बहाव क्षेत्र में खनन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। खनन गतिविधियों की लगातार निगरानी होनी चाहिए और आपदा प्रबंधन को लेकर भी ठोस उपाय होने चाहिए।