मंत्रियों के समूह की बैठक में तेलंगाना पर आगे बढ़ने के फैसले के बाद त्यागपत्र देने वाले सीमांध्र के केंद्रीय मंत्रियों के इस्तीफे पीएम और कांग्रेस हाईकमान द्वारा मंजूर किए जाने के आसार काफी कम हैं।
दरअसल, इस्तीफा मंजूर नहीं कर एक तीर से दो निशाने साधे जाने की बात है। मंत्रियों ने अपने क्षेत्र में लोगों को संदेश देने के लिए इस्तीफा दे दिया है, जबकि मंजूर न होने की स्थिति में इनका मंत्री पद भी सुरक्षित है।
सूत्रों का कहना है कि एक बार प्रदेश में तनाव कम होने के बाद ये मंत्री वापस अपना पद संभाल सकते हैं। सीमांध्र क्षेत्र के ज्यादातर मंत्रियों ने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को दे दिया है।
मानव संसाधन मंत्री पल्लम राजू, पर्यटन मंत्री चिरंजीवी, रेल राज्यमंत्री सूर्यप्रकाश रेड्डी और राज्यमंत्री पुरंदेश्वरी ने अपना इस्तीफा दे दिया है, जबकि कैबिनेट मंत्री केएस राव, किशोर चंद्र देव और जेडी सेलम ने इस्तीफा नहीं दिया है।
प्रधानमंत्री ने अभी किसी मंत्री का इस्तीफा मंजूर नहीं किया है। आंध्र प्रदेश के एक वरिष्ठ नेता कहते है कि मंत्री पद जाने के बाद इन सांसदों का प्रदेश में रुतबा कम होगा।
इसलिए भी मंत्रियों का इस्तीफा मंजूर नहीं किया जा रहा है।
शुक्रवार को मंत्रियों के समूह की बैठक में प्रदेश के बंटवारे का रोडमैप तैयार कर लिया गया। सीमांध्रा क्षेत्र के लोगों को वित्तीय पैकेज देकर खुश करने की बात है।
कांग्रेस हाईकमान को उम्मीद है कि इस तरह के कदम से अलग राज्य बनाने को लेकर पैदा आक्रोश खत्म हो सकता है। साथ ही एक बार तनाव कम होने के साथ ही इस्तीफा देने वाले मंत्री अपने काम पर वापस लौट सकते हैं।
इसलिए हाईकमान ने इस्तीफा मंजूर नहीं कर सभी विकल्प खुले रखे हैं।