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46 कोल ब्लॉकों पर लगेगा भारी जुर्माना!

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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से 46 कोल ब्लॉकों का आवंटन बरकरार रहने की सूरत में 295 रुपये प्रति टन के हिसाब से भारी जुर्माना लगाए जाने का प्रस्ताव किया है।
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सोमवार को केंद्र सरकार ने निजी कंपनियों की लॉबी से दूरी बनाते हुए अदालत में दाखिल एक हलफनामे में कहा है कि वह 46 कोल ब्लॉकों को रद्द न करने की मांग नहीं कर रही है।

कोलगेट सुनवाई से एक दिन पहले सोमवार को दायर हलफनामे में कहा गया है कि अटार्नी जनरल ने उल्लेख किया था कि कोयले का उत्पादन करने वाले 40 कोल ब्लॉक और इनसे जुड़े कोयले का उपयोग करने वाले प्लांट हैं।
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इसके अलावा छह ऐसे कोल ब्लॉक हैं, जिनमें कोयले का उत्पादन शुरू होने वाला है। केंद्र सरकार का कहना है कि अटार्नी जनरल की ओर से यह बात सिर्फ अदालत को सूचना देने के लिए कही गई थी और केंद्र सरकार किसी खास कदम पर जोर नहीं दे र
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प्रति टन 295 रुपये अतिरिक्त लेवी

केंद्र सरकार का कहना है कि अगर अदालत 46 कोल ब्लॉकों के आवंटन को बरकरार रखती तो प्रति टन 295 रुपये अतिरिक्त लेवी लगाने पर विचार किया जाना चाहिए। सीएजी ने अतिरिक्त लेवी लगाने की सिफारिश की थी।

इसके अलावा इन कोल ब्लॉकों को राज्य की कंपनियों/डिस्कॉम के साथ पावर परचेज एग्रीमेंट पीपीए करना चाहिए जिससे इसका लाभ ग्राहकों तक पहुंचाया जा सके।

सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में सिर्फ दो तरह की खान ओपेन कास्ट और मिक्स माइन्स पर विचार करते हुए वित्तीय नुकसान का आकलन किया था। इस प्रक्रिया में अंडरग्राउंड माइन्स को ध्यान में नहीं रखा गया था। केंद्र सरकार ने अंडरग्राउंड माइन्स पर भी अदालत से निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है।

केंद्र सरकार ने हलफनामे में कहा है कि बड़ी संख्या में आवंटियों ने आवंटित किए गए ब्लॉक की जमीन का टाइटल (स्वामित्व) अपने नाम करा लिया है और अब इस आवंटन को अवैध करार दिया गया है।
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केंद्र ने की सख्त कदम की मांग

कोल ब्लॉक का आवंटन रद्द होने पर जमीन का टाइटल आवंटी के नाम पर ही रहेगा। ऐसे मामलों में आवंटी को निर्देश दिया जाना चाहिए कि वह जमीन की खरीद कीमत के भुगतान पर केंद्र सरकार या उसके नामित को जमीन वापस करे।

सरकार ने अदालत से यह भी स्पष्ट करने की मांग की है कि कोल ब्लॉक आवंटन के बाद की गई माइनिंग लीज रद्द मानी जाएगी और इसकी कोई कानूनी वैधता नहीं होगी।

केंद्र सरकार ने ऐसे मामलों में आगे कदम उठाने के लिए निर्देश जारी करने की मांग की है,जहां बड़ी संख्या में बैंक गारंटी दांव पर है।  

केंद्र सरकार ने अदालत को बताया है कि अंतर-मंत्रालयी समूह ने 80 कोल ब्लॉकों का आवंटन रद्द किया है और कुछ मामलों में बैंक गारंटी भुनाई गई है। केंद्र सरकार ने अदालत से पूछा है कि ऐसे मामलों में क्या किया जाना चाहिए।
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