अज्ञात शवों की पहचान और आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए डीएनए डाटा बैंक तैयार करने पर केंद्र सरकार ने हाथ खड़े कर दिए हैं। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि देश में गिनती के फोरेंसिक लैबोरेटरी हैं और जांचकर्ताओं की भी भारी कमी है। ऐसे में डीएनए प्रोफाइल सेवाएं मुहैया कराना मुश्किल है।
केंद्र ने एक हलफनामे में कहा है कि डीएनए बैंक के लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षित कर्मियों की जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक एक डीएनए जांचकर्ता प्रतिवर्ष सौ मामलों पर ही काम कर सकता है। देश में प्रतिवर्ष चालीस हजार सैंपल लिए जाएंगे। ऐसे में चार सौ जांचकर्ता चाहिए।
सीडीएफडी हैदराबाद के मुताबिक अभी प्रति मामले के लिए बीस हजार रुपये की लागत आएगी। साथ ही प्रतिवर्ष चालीस हजार अज्ञात शवों की पहचान का खर्च करीब 80 करोड़ रुपये आएगा। लैब की कमी के साथ जांचकर्ताओं भी नहीं है। ऐसे में डीएनए प्रोफाइल सेवा देना मुश्किल है।