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बदायूं कांड: आखिर कब निकाले जाएंगे लड़कियों के शव?

Thu, 10 Jul 2014 12:53 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बदायूं
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कटरा सआदतगंज मामले में सीबीआई ने दोनों लड़कियों के शवों का फिर से पोस्टमार्टम कराने के लिए बुधवार को कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की। जांच एजेंसी ने शवों को निकालने के लिए न तो कोर्ट में अर्जी दी और न ही डीएम से इसकी इजाजत मांगी।
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इस बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट में मामले की जांच की स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने गए सीबीआई की एक टीम यहां लौट आई है।

बता दें कि 28 मई की रात डॉ. अवधेश कुमार, डॉ. राजीव गुप्ता और डॉ. पुष्पा पंत त्रिपाठी के पैनल ने दोनों लड़कियों का पोस्टमार्टम किया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत ही वजह स्पष्ट नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट की झोल समझने के लिए जांच एजेंसी ने कई बार डॉक्टरों के पैनल से पूछताछ की। बावजूद इसके जब कई पहलुओं से पर्दा नहीं उठ सका तो सीबीआई ने दोनों शवों का फिर से पोस्टमार्टम कराने का निर्णय लिया।

मंगलवार को यह खबर यहां मिलने के बाद अटैना गंगा घाट पर पुलिस भी तैनात कर दी गई थी। माना जा रहा था कि इलाहाबाद से लौटने वाली सीबीआई की टीम शव निकालने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है।
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शवों की सुरक्षा के लिए दो सिपाही तैनात

दोनों लड़कियों के शवों को अटैना गंगा घाट पर जिस जगह दफनाया गया है, वहां जंगली कुत्ते घूम रहे हैं। दोनों शवों का पोस्टमार्टम किए जाने की खबर आने के बाद वहां दो सिपाहियों को तैनात कर दिया गया है। शव जहां दफन किए गए हैं, वह जगह गंगा की धारा से कुछ ही फुट दूर है। गंगा में पानी बढ़ने पर लड़कियों के शव मिलना मुश्किल हो सकता है।

परिवार वालों ने 28 मई को पोस्टमार्टम के बाद दोनों लड़कियों के शव कटरा सआदतगंज गांव से करीब चार किलोमीटर दूर अटैना गंगा घाट पर दफन किए थे। अटैना गंगा घाट पर जब अमर उजाला टीम पहुंची तो यहां एक ग्रामीण ने उस जगह के बारे में बताया, जहां पर दोनों बहनों के शव दफन किए गए थे।

डीएम शंभूनाथ का कहना है कि इस संबंध में सीबीआई की ओर से अब तक आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। अगर जांच एजेंसी शवों का पोस्टमार्टम फिर से कराना चाहती है तो इसके लिए उसे इजाजत लेनी होगी।
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गांव वाले बोले, जल्द सामने आए सच्चाई

दो बहनों से बलात्कार और हत्या की वारदात को बुधवार को 48 दिन हो चुके हैं। सीबीआई भी 26 दिन से मामले की परतें खोलने में जुटी हुई है। बावजूद इसके खुलासा जल्द होता नजर नहीं आ रहा है। अखबारों के जरिए बुधवार को जब गांव के लोगों को पता चला कि अटैना गंगा घाट पर दफन किए गए लड़कियों के शव निकाल कर उनका फिर से पोस्टमार्टम कराया जाएगा, तो गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

दोनों लड़कियों के पिता समेत गवाह बाबूराम और रामबाबू को सीबीआई रविवार को नार्को, लाई डिटेक्टर और ब्रेन मैपिंग टेस्ट के लिए दिल्ली ले गई थी। इसके बाद से पीड़ित परिवार की महिलाएं असमंजस में हैं। घर भी सूना है। हालांकि यहां सुरक्षा के लिए पुलिस और पीएसी तैनात है। गांव में जो लोग पढ़े लिखे हैं, उनकी नजर इस प्रकरण से जुड़ी खबरों पर रहती है।

पीड़ित परिवार के घर के पास ही एक घर के दरवाजे पर बैठी महिलाओं से जब अमर उजाला टीम ने शवों के फिर से पोस्टमार्टम कराए जाने के संबंध में पूछा। इस पर उन्होंने साफ कहा कि कुछ भी हो, अब इस मामले का जल्द से जल्दा खुलासा हो और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। मुख्य गवाह बाबूराम के माता-पिता, पत्नी और तीन बेटे हैं। बाबूराम का घर पर सूना पड़ा है। गांव से अटैना गंगा घाट की ओर जाते समय रास्ते में सर्वयूपी ग्रामीण बैंक की ब्रांच पड़ती है। इसी ब्रांच में पीड़ित परिवार ने राजनीतिक दलों से आर्थिक सहायता के रूप में मिली रकम जमा की है। यहां की एक चौपाल पर बैठे ग्रामीणों से बातचीत की कोशिश की लेकिन वे बाहरी लोगों से बात करने से बचते नजर आए।
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