केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा है कि कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले की जांच की स्टेटस रिपोर्ट का मसौदा कानून मंत्री अश्विनी कुमार को दिखाया गया था, क्योंकि वे खुद ऐसा चाहते थे।
सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा ने हलफनामे बताया है कि स्टेटस रिपोर्ट का मसौदा प्रधानमंत्री कार्यालय और कोयला मंत्रालय के संयुक्त सचिव स्तर के आधिकारियों ने भी देखा था।
विपक्ष ने प्रधानमंत्री, कानून मंत्री का इस्तीफा मांगा
सुप्रीम कोर्ट मे आज पेश दो पेज का हलफलनामा मामले की पिछली सुनवाई में सीबीआई वकील के उस दावे से बिलकुल उलट है, जिसमें उन्होंने कहा था कि कोलब्लॉक आवंटन की स्टेटस रिपोर्ट सरकार के किसी अधिकारी ने नहीं देखी है।
सीबीआई के हलफनामे के बाद कानून मंत्री अश्विनी कुमार कठघरे में आ गए हैं।
भाजपा और वामदलों ने कानून मंत्री को बर्खास्त करने की मांग की है। भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि इस मामले में प्रधानमंत्री और कानून मंत्री दोनों को इस्तीफा देना चाहिए।
वहीं, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस मुद्दे पर यूपीए के सहयोगी दलों की बैठक की है। बैठक के बाद संसदीय कार्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि सीबीआई के हलफनामे के मुददे् पर कानून मंत्री के इस्तीफे से इनकार कर दिया है।
कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने इस मुद्दे पर कहा है कि सच्चाई की अंत में जीत होगी।
सीबीआई का हलफनामा
सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा ने बताया कि कोल ब्लॉक आवंटन के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल स्टेटस रिपोर्ट के मसौदे को कानून मंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय और कोयला मंत्रालय के अधिकारियों को दिखाया गया था।
हलफनामे में सीबीआई ने कहा कि कोल ब्लॉक आवंटन के मुद्दे पर दाखिल नई स्टेटस रिपोर्ट को किसी भी कार्यपालिका के किसी भी व्यक्ति के साथ साझा नहीं किया गया है।
हालांकि सीबीआई ने हलफनामे ये नहीं बताया गया है कि कानून मंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों ने रिपोर्ट देखने के बाद क्या बदलाव सुझाए और वे बदलाव रिपोर्ट में शामिल किए गए या नहीं।