सरकार को गहरे संकट में डालने वाला कोयला घोटाला अब प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को अपनी चपेट में लेता दिख रहा है।
इस मामले की जांच कर रही सीबीआई ने उन दो नौकरशाहों से पूछताछ की है, जो कोल ब्लॉक आवंटित होने के वक्त पीएमओ में कार्यरत थे। इन अधिकारियों के नाम विनी महाजन और आशीष गुप्ता हैं।
इन अधिकारियों ने कथित तौर पर उन कोल फील्ड का ब्योरा मांगा गया, जो 2006 से 2009 के बीच निजी कंपनियों को सौंपी गई थीं। उस वक्त प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास कोयला मंत्रालय का सीधा प्रभार था।
इस दौरान टीकेए नायर प्रधान सचिव और पीएमओ के सबसे वरिष्ठ अफसर थे। नायर प्रधानमंत्री के करीबी सलाहकार माने जाते हैं। सीबीआई अब नायर से पूछताछ करने की योजना बना रही है।
जांच एजेंसी को कोलगेट से जुड़ी अपनी जांच की प्रगति पर सुप्रीम कोर्ट को 10 जुलाई को जानकारी देनी है। यह सारा विवाद इस बात से जुड़ा है कि कुछ निजी कंपनियों को इतनी सस्ती दरों पर खनन का कीमती अधिकार क्यों दे दिया गया।
सीबीआई यह पहले ही कह चुकी है कि सरकार की जिस स्क्रीनिंग कमेटी पर इन कंपनियों से आवेदन मंगाने और उनकी जांच का जिम्मा था, उसने उनके बैकग्राउंड की जांच नहीं की और पारदर्शिता भी नहीं बरती गई।