आदर्श घोटाले से महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण का नाम हटाने की सीबीआई की मांग खारिज हो गई है। विशेष अदालत ने शनिवार को इस संबंध में सीबीआई की याचिका खारिज कर दी।
सीबीआई की विशेष अदालत के जज एसजी दीघे ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि भले ही गवर्नर के. शंकरनारायणन ने चह्वाण के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं दी हो लेकिन उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है। आखिर उन्हें आपराधिक कदाचार का दोषी ठहराया गया है।
सीबीआई की विशेष अदालत में चली बहस के दौरान विशेष लोक अभियोजक भारत बादामी ने कहा कि सीबीआई को पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर बेहद खुशी होगी। लेकिन हमारे हाथ बंधे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि गवर्नर की नामंजूरी के खिलाफ अपील करने का कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि सीबीआई उनसे अपने फैसले की समीक्षा करने के लिए कह सकती है। लेकिन यह तभी संभव है जब सीबीआई के पास मामले में मौजूद पहले के सुबूत के अलावा भी कोई सुबूत हों।
सीबीआई ने 15 जनवरी को विशेष अदालत में एक याचिका दायर की थी, जिसमें गवर्नर के निर्देश का हवाला देकर आदर्श घोटाले में आरोपित 13 लोगों की सूची में से चह्वाण का नाम हटाने की अपील की गई थी।
गवर्नर के आदेश पर अपील न किए जाने के नियम का भी हवाला दिया गया था। अगर विशेष अदालत ने सीबीआई की याचिका को मंजूर कर लिया होता तो कांग्रेस और चह्वाण को भारी राहत मिल जाती।
आदर्श घोटाले की जांच करने वाले न्यायिक आयोग ने मामले में अशोक चह्वाण समेत विलासराव देशमुख और सुशील कुमार शिंदे को भी दोषी ठहराया है। देशमुख का निधन हो चुका है।