सीबीआई को मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में उस वक्त शर्मिंदगी झेलनी पड़ी, जब केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने कोयला घोटाले के पांच मामलों को बंद करने के उसके अधिकारियों की राय को नकार दिया।
साथ ही प्रथम दृष्टया साक्ष्य मौजूद होने के आधार पर एफआईआर दर्ज करने को कहा। अदालत ने मामले की सुनवाई 18 जुलाई के लिए स्थगित कर दी है।
सीबीआई के ढांचे के मुताबिक जांच अधिकारियों की शुरुआती छानबीन की अंतिम पड़ताल केंद्रीय एजेंसी के निदेशक द्वारा की जाती है लेकिन इस मामले में शीर्षस्थ अदालत की ओर से सीवीसी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
सीवीसी ने अदालत में इस मसले पर अपनी दो रिपोर्ट सौंपते हुए इंगित किया है कि जांच अधिकारियों ने एफआईआर दर्ज करने की सामग्री पाई है, जो कथित तौर पर कोल ब्लॉक आवंटन की अनियमितताओं से संबंधित है।
जांच और वरिष्ठ अधिकारियों की राय अलग
सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों ने इन्हीं मामलों को बंद करने को कहा था। जांच और वरिष्ठ अधिकारियों की राय अलग होने की वजह से करीब दो दर्जन मामले सीवीसी को अदालत ने भेजे थे। साथ ही कहा था कि जांच पूरी तरह से सही और पक्षपात रहित सुनिश्चित होनी चाहिए।
सीवीसी ने कारण स्पष्ट करते हुए कहा है कि प्रथम दृष्टया साक्ष्यों के आधार पर इन मामलों में जांच अधिकारियों की राय से वह सहमत है और सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों से नहीं।
आयोग ने चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा की पीठ के समक्ष सीबीआई के उस वरिष्ठ अधिकारी से भी असहमति जताई, जिसकी ओर से इन मामलों को बंद करने को कहा गया था।
याद रहे कि 28 मार्च को अदालत ने सीवीसी को जांच और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच राय भिन्न होने पर सहायता करने को कहा था। यह आदेश एनजीओ कामन काज की मांग पर जारी हुआ था।
सर्वोच्च अदालत में तब सीबीआई ने इस पर जोर दिया था कि सीवीसी की ओर से एजेंसी के जांच मामलों की समीक्षा किया जाना मौजूदा कानूनी व्यवस्था से परे है। लेकिन अदालत ने ट्रायल कोर्ट में मामले बंद करने संबंधी रिपोर्ट दायर करने से रोकते हुए आयोग से इन मामलों पर सहायता करने को कहा था।
168 प्रारंभिक जांच में से 166 निष्कर्ष तक पहुंची
सीवीसी की दोनों रिपोर्ट की पुष्टि एनजीओ के अधिवक्ता प्रशांत भूषण की ओर से की गई। वहीं सीबीआई ने भी पीठ को बताया कि 168 प्रारंभिक जांच में से 166 अंतिम निष्कर्ष तक पहुंची है।
सीबीआई की प्रारंभिक जांच पर सतर्कता आयोग की दो रिपोर्ट के गौर के बाद अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी इन सिफारिशों पर आगे कार्यवाही कर सकती है।
सीबीआई से कहा गया था कि वह इस मामले में दर्ज किसी भी प्रकरण में अपने आप ही निचली अदालत में मामला बंद करने की रिपोर्ट दाखिल नहीं करेगा।
सीबीआई ने एक बार फिर अदालत से अनुरोध किया कि उसे केंद्रीय सतर्कता आयोग के पास जाए बगैर ही सीधे मजिस्ट्रेट के समक्ष मामला रखने की अनुमति दी जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने इस सुझाव पर सहमति व्यक्त की कि यह काम विशेष लोक अभियोजक पर छोड़ दिया जाए और संबंधित पक्षों से कहा कि वे इस काम के लिए उचित विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने पर सहमत हों।