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सेना के दो मेजर जनरल के खिलाफ होगी सीबीआई जांच

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रक्षा मंत्रालय ने सीबीआई को पत्र लिखकर सेना के दो कार्यरत मेजर जनरल के पास कथित रूप से ज्ञात स्रोत से आय से अधिक संपत्ति के मामले की जांच करने को कहा है। रक्षा मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को सीबीआई को यह प्रस्ताव भेज दिया है और मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है।
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मंत्रालय सूत्र का कहना है कि दोनों मेजर जनरल के विरुद्ध काफी पहले शिकायत मिली थी। प्रथम दृष्टया शिकायत का आधार मजबूत होने के बाद रक्षा मंत्री मनोहर परिकर के दिशा निर्देश के तहत सीबीआई से जांच करने की सिफारिश की गई है। सेना के दोनों मेजर जनरल सेना के दो विभिन्न विभाग से हैं और दिल्ली में ही तैनात हैं।

इनका नाम मेजर जनरल अशोक कुमार और मेजर जनरल एसएस लांबा बताया जा रहा है। दोनों को पिछले साल अतिविशिष्ट सेवा मेडल मिला था। इनमें से एक मेजर जनरल अशोक कुमार आर्मी सर्विस कोर में जबकि दूसरे मेजर जनरल एसएस लांबा आर्मी आर्डिनेंस कोर में तैनात हैं। दोनों ही मेजर जनरल पर आरोप है कि इन्होंने ट्रांसफर पोस्टिंग समेत अन्य में रिश्वत लेकर काफी संपत्ति बनाई है।
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दोनों ही मेजर जनरल इसी साल हो रहे सेवामुक्त

इस क्रम में सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि दोनों ही मेजर जनरल इसी साल सेवामुक्त हो रहे हैं। इनमें मेजर जनरल लांबा इसी महीने की 31 तारीख को जबकि अशोक कुमार 29 फरवरी को अवकाश प्राप्त कर रहे हैं। इस प्रकरण में ले. जनरल (रिटा.) आर. भल्ला को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

लेफ्टिनेंट जनरल भल्ला पूर्व सैन्य सचिव रहे हैं और कहा जा रहा है उनके समय में सैन्य अफसरों को प्रमोशन देने वाले बोर्ड का गठन हुआ था। हालांकि इस मामले में साथ ब्लाक के अधिकारी ज्यादा कुछ जानकारी देने से परहेज कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि सितंबर में तीन लेफ्टिनेंट जनरल का पद रिक्त होने के कारण सैन्य अफसरों की इस पद पर प्रोन्नति होनी थी।

सेना के स्पेशल प्रमोशन बोर्ड के पास पदोन्नति के क्रम में 33 अफसरों की सूची आई। सूत्र बताते हैं कि इन अफसरों से जुड़ी तमाम जानकारियां एकत्र की गई थी और इसके बाद यह मामला गंभीर होता गया। ऐसे भी आरोप हैं कि दोनों अफसरों ने पदोन्नति पाने के लिए बाकायदा रिश्वत दी थी।

इसमें से एक मेजर जनरल पर सीमा सड़क संगठन में रहने के दौरान भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। बताते हैं तब भी मामला सीबीआई के पास पहुंचा था, लेकिन जांच में किसी तरह का कोई भी आपराधिक कृत्य सामने नहीं आया था। ऐसे में जांच एजेंसी ने क्लीन चिट दे दी थी। बाद में सतर्कता विभाग समेत अन्य से क्लीन चिट मिल गई थी। इसी आधार पर दोनों अफसरों पदोन्नति पाने के लिए संभावित अफसरों की सूची में शामिल किए गए थे, लेकिन एक बार फिर शिकायत के आधार को देखते हुए जांच एजेंसी के राडार से गुजरने की नौबत आ गई है।
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