वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने एक तरफ सीबीआई के काम में सरकार के हस्तक्षेप के आरोपों से इनकार किया तो वहीं, सीबीआई को सरकारी नीतियों में संभलकर जांच करने की सलाह भी दे डाली।
पी चिदंबरम ने मंगलवार को कहा कि देश की प्रमुख जांच एजेंसी सीबीआई न तो पिंजड़े का तोता है और न ही कांग्रेस ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन।
चिदंबरम ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सीबीआई के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि सीबीआई के बारे में पिंजरे का तोता जैसे कई मिथक प्रचारित हैं जो बिल्कुल गलत हैं और संकीर्ण स्वार्थों के चलते फैलाये गए हैं।
उन्होंने कहा कि सीबीआई भी दुनिया की अन्य जांच एजेंसियों की तरह ही है।
सीमा न लांघे जांच एजेंसी
साथ ही चिदंबरम ने सीबीआई और सीएजी जैसी जांच एजेंसियों को अपनी हदें पार न करने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि ये एजेंसियां कार्यपालिका के उचित फैसलों को अपराध या अधिकारों के दुरुपयोग के मामले में बदलने का प्रयास करके अपनी सीमा लांघती हैं।
उन्होंने कहा कि जहां एक नियम निर्धारित किया गया है और उसके पीछे कोई नीति है। यह जांच एजेंसियों का काम नहीं है कि वो उस नीति के पीछे के कारणों पर सवाल करे या उनकी नजर में बेहतर नई नीति की सलाह दे।
वित्त मंत्री ने एजेंसियों को पॉलिसी मेकिंग और पुलिसिंग के बीच की रेखा का सम्मान करने की नसीहत दी।
पीएम ने भी दी नसीहत
इससे पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी सीबीआई को नीतिगत मामलों की जांच में सावधानी बरतने की नसीहत दी थी।
सोमवार को मनमोहन सिंह ने दो टूक शब्दों में आगाह किया था कि जांच एजेंसियां अपनी जांच प्रक्रिया में सरकार की नीतियों, नीतिगत और प्रशासनिक फैसलों को शामिल करने से बाज आएं।
प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री की इस खरी-खरी को कुमारमंगलम और पारिख के खिलाफ सीबीआई के एफआईआर दर्ज करने से जोड़ कर देखा जा रहा है। जांच एजेंसी के इस कदम के बाद मनमोहन सिंह की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे थे।
उस दौरान कई केंद्रीय मंत्रियों ने भी सीबीआई जांच के तरीके पर सीधा हमला बोला था। सोमवार को इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री ने सीबीआई को अपने जांच के दायरे की लक्ष्मण रेखा की याद दिलाई।