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फिर टकराव के मोड़ पर CBI और आईबी

Mon, 11 Nov 2013 12:34 AM IST
गुंजन कुमार/अमर उजाला, दिल्ली
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गुजरात पुलिस के हाथों मारे गए सादिक जमाल के बारे में खुफिया एजेंसी आईबी की मुंबई शाखा का लिखित ब्यौरा आईबी मुख्यालय के लिए मुसीबत बन गया है। इस वजह से देश की दो बड़ी एजेंसियां एक बार फिर आमने-सामने खड़ी दिख रही हैं।
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इससे पहले इशरत जहां फर्जी एनकाउंटर की जांच में भी आईबी के पूर्व विशेष निदेशक राजेंद्र कुमार के चलते दोनों एजेंसियों के बीच ठन गई थी। गृह मंत्रालय के बीच बचाव के बाद मामला ठंडा पड़ा था।

सीबीआई सूत्रों ने बताया कि इशरत एनकाउंटर के करीब एक साल पहले 3 जनवरी 2003 को गुजरात पुलिस ने सादिक जमाल का भी एनकाउंटर किया था।

पुलिस को इशरत और उसके तीन साथियों की तरह इस पर भी गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को मारने की योजना का शक था। सादिक को लेकर आईबी की गुजरात शाखा ने मुंबई शाखा को अलर्ट किया। इसमें आईबी के दो वरिष्ठ अधिकारी सुधीर कुमार और राजेंद्र कुमार शामिल थे।
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मुंबई आईबी ने सादिक से लंबी पूछताछ के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि वह नरेंद्र मोदी जैसे शख्स को मारने की क्षमता नहीं रखता। लिहाजा उससे कोई खतरा नहीं। मुंबई आईबी ने यह बात लिखित रूप से गुजरात आईबी को बता दी और उसकी एक प्रति आईबी के दिल्ली मुख्यालय भी भेज दी।

सूत्रों के मुताबिक इसके बाद दिसंबर 2002 के आखिर में गुजरात पुलिस सादिक को मुंबई से अहमदाबाद ले आयी। इससे पहले कि ऊपर के अधिकारियों के बीच कोई बातचीत होती, सादिक का एनकाउंटर हो गया।

इस मामले में दायर सीबीआई चार्जशीट के मुताबिक सादिक मुंबई आने से पहले दुबई में अंडरवर्ल्ड डान के एक रिश्तेदार के यहां काम किया करता था। वहां घर की मालकिन से उसकी कहासुनी हो गई थी।

सादिक के एनकाउंटर के बाद उसके भाई ने अदालत में गुहार लगाई। गुजरात हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने इसकी जांच शुरू की।

सीबीआई सूत्रों के मुताबिक इशरत मामले में आईबी अलर्ट से संबंधित कोई लिखित सुबूत नहीं है। लेकिन इस मामले में मुंबई आईबी के लिखित बयान से शक की कोई गुंजाइश नहीं रह गई है कि इस एनकाउंटर में आईबी के कुछ अधिकारी भी शामिल थे।
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