चारा घोटाले की वजह से अर्श से फर्श पर आए लालू प्रसाद यादव को जमानत दिए जाने का सीबीआई ने कड़ा विरोध किया है।
सर्वोच्च अदालत से केंद्रीय एजेंसी ने कहा है कि लालू प्रसाद जमानत पर छूटे 37 दोषियों से अपनी तुलना न करें। घोटाले में उनकी सक्रिय भूमिका साबित हो चुकी है और उन्होंने सजा की आधी अवधि भी जेल में नहीं काटी है। ऐसे में उनकी जमानत याचिका खारिज की जानी चाहिए।
सीबीआई के पुलिस अधीक्षक एसके खरे ने सर्वोच्च अदालत में हलफनामा दायर कर कहा है कि पश्चिम सिंघभूम जिले की चाईबासा ट्रेजरी को चारा, दवाईयों और उपकरण वगैरह खरीदने के लिए एक वित्तीय वर्ष में सिर्फ 4.60 लाख रुपये का ही अधिकार था, लेकिन फर्जी बिलों की मदद से 37.70 करोड़ निकाले गए।
पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद को इस साजिश में शामिल अफसरों की सांठगांठ की भली-भांति जानकारी थी। यही वजह थी कि साजिश में शामिल अभियुक्तों की सेवानिवृत्ति के बावजूद उन्हें सेवा विस्तार प्रदान किया गया।
एजेंसी ने यह भी कहा है कि घोटाले में शामिल डॉ. आरके राणा ने लालू के बच्चों की फीस का भुगतान किया। इसके लिए बाकायदा ड्राफ्ट तैयार किया गया।
लालू और उनके परिवार के सदस्यों के लिए हवाई टिकट खरीदने की बात भी ट्रायल में साबित हो चुकी है। इसके अलावा लालू के खिलाफ अभी चारा घोटाले से संबंधित चार अन्य मुकदमे चल रहे हैं। एक ट्रायल अंतिम दौर में है।
हलफनामे में सीबीआई ने कहा है कि सर्वोच्च अदालत में दायर याचिका में लालू ने भेदभाव का आरोप लगाया है जो सही नहीं है। झारखंड हाईकोर्ट ने 25 अभियुक्तों को आधी से अधिक सजा काटने के कारण जमानत प्रदान की है। लेकिन लालू के साथ ऐसा नहीं है।