सहारनपुर दंगे से ठीक पहले कुतुबशेर थाने पहुंचे विधान परिषद सदस्य उमर अली और पूर्व विधायक इमरान मसूद के खिलाफ कुतुबशेर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। गोली लगने से घायल तेजेंद्र सिंह के पिता की तहरीर पर मोहर्रम अली उर्फ पप्पू के साथ एमएलसी और पूर्व विधायक नामजद हैं।
दंगे के तीन दिन बाद ही दर्ज हुए इस मुकदमे को पुलिस दबाने में जुटी है। नामजद मुकदमा दर्ज होने के बाद भी पुलिस ने अब तक इनकी गिरफ्तारी की भी कोई कोशिश नहीं की है। इस एफआईआर से दंगे के सियासी कनेक्शन को लेकर हलचल तेज हो गई है।
दंगे में गोली लगने से घायल तेजेंद्र सिंह के पिता गुरुचरन सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 26 जुलाई को जब दूध लेने के लिए गुरुद्वारा रोड पर गया तो बाहर दंगाई गुरुद्वारे पर गोली और पत्थर बरसा रहे थे। दंगाइयों की भीड़ का नेतृत्व पूर्व सभासद मोहर्रम अली उर्फ पप्पू, एमएलसी उमर अली खां और पूर्व विधायक इमरान मसूद कर रहे थे।
आठ दिन बाद भी गिरफ्तारी नहीं
तेजेंद्र को भीड़ से हो रही फायरिंग से उसके पेट में गोली लग गई। वह जमीन पर गिर गया, जिसके बाद उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसकी हालत गंभीर होने के कारण उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पुलिस ने इस शिकायत पर 29 जुलाई को मोहर्रम अली उर्फ पप्पू, एमएलसी उमर अली खां और पूर्व विधायक इमरान मसूद सहित अन्य पर मुकदमा दर्ज किया है।
एफआईआर दर्ज होने के आठ दिन बाद भी अब तक पुलिस ने उमर अली और इमरान मसूद से पूछताछ तक नहीं की है। जबकि एफआईआर के बाद दंगे सूत्रधार मोहर्रम अली उर्फ पप्पू को गिरफ्तार कर लिया है।
एमएलसी और पूर्व विधायक एक मंच पर कैसे पहुंचे?
उधर, दंगे के बाद से पप्पू के सियासी कनेक्शन को लेकर बवाल मचा हुआ है। एफआईआर का खुलासा करने वाले भाजपा नेता रणदीप पुंडीर ने सवाल उठाए हैं कि आखिर उमर अली और इमरान मसूद किसके बुलावे पर कुतुबशेर गए थे।
शाही इमाम के दामाद एमएलसी और पूर्व विधायक एक-दूसरे के धुर विरोधी हैं। ऐसे में वे एक साथ कैसे एक मंच पर पहुंचे? आठ दिन पहले दर्ज हुए मुकदमे को पुलिस दबाने में जुटी है। मामला सत्ता से जुड़ा होने के कारण पुलिस इसमें किसी तरह के एक्शन से भी कतरा रही है।
एमएलसी उमर अली खां ने मुकदमा दर्ज होने के बाद कहा कि भाजपाइयों ने मामला भड़काने के लिए मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया है। इसमें पुलिस जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी। पूर्व विधायक इमरान मसूद ने कहा कि मुकदमा तो सांसद राघव के खिलाफ दर्ज होना चाहिए। उसने ईंद का त्योहार नहीं मनने दिया। शहर में घूम कर लोगों को भड़काया। पुलिस उसको छोड़कर हमारे पीछे पड़ी है।
वहीं, सहारनपुर के एसएसपी राजेश कुमार पांडेय का कहना है कि जिस एफआईआर में एमएलसी उमर अली खान और पूर्व विधायक इमरान मसूद का जिक्र है वह मुकदमा संख्या 306एआर है। दंगे की पहली रिपोर्ट इंस्पेक्टर कुतुबशेर की ओर से मुकदमा संख्या 306 लिखाई गई थी। उसमें इस बात का जिक्र है कि एडीएम और एसपी सिटी के साथ एमएलसी उमर अली खान, पूर्व विधायक इमरान मसूद सहित और भी नेता थे। ये सारे लोग बातचीत कर रहे थे। दंगों के बाद मुकदमों की संख्या बहुत ज्यादा थी, इसमें किसी खुराफाती ने एमएलसी और पूर्व विधायक के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करा दी। प्राथमिक जांच में यह बात सामने आ गई थी कि दंगों में इनका कोई रोल नहीं है। विवेचना में भी यह बात सामने आ जाएगी।