यूपी के शहरी विकास मंत्री और सपा के कद्दावर नेता आजम खान अपने विवादित भाषण के चलते कानूनी शिकंजे में फंस गए हैं। भड़काऊ भाषण देने के आरोप में चुनाव आयोग के निर्देश पर उनके खिलाफ संगीन धाराओं में गाजियाबाद के मसूरी और शामली में केस दर्ज कराया गया है।
आजम खान पर 7 अप्रैल को मसूरी मैदान में गाजियाबाद से सपा प्रत्याशी सुधन रावत के पक्ष में आयोजित सभा में भड़काऊ भाषण देने का आरोप है। मामले की जांच मसूरी थाने के एसएसआई रामचंद्र को सौंपी गई है। साथ ही आजम खान पर आठ अप्रैल को कैराना लोकसभा सीट से सपा प्रत्याशी नाहिद हसन के समर्थन में जलालाबाद में हुई जनसभा में भड़काऊ भाषण देने का आरोप है। इस मामले में उनके खिलाफ शामली में केस दर्ज हुआ है।
इतना ही नहीं, आजम खान के खिलाफ रामपुर में भी मुकदमा दर्ज हुआ है। यहां सपा नेता के खिलाफ एआरओ अमित सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई है।
शामली में आजम के खिलाफ केस दर्ज
कैराना लोकसभा सीट से सपा प्रत्याशी नाहिद हसन की आठ अप्रैल को जलालाबाद में हुई जनसभा में भड़काऊ भाषण देने के मामले में प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री आजम खान के खिलाफ प्रशासन ने शामली में शनिवार को रिपोर्ट दर्ज करा दी है। आरोप है कि जनसभा में आजम खान ने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी पर हमला करते हुए अमर्यादित भाषाओं का प्रयोग किया था।
प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए जनसभा की सीडी को देखा। उड़नदस्ता प्रभारी प्रभारी शशांक कुमार की ओर से थानाभवन पुलिस को दी गई तहरीर में आजम खान पर गुजरात दंगों का सहारा लेकर मोदी की ओर इशारा करते हुए दरिंदे जैसे शब्दों के प्रयोग के साथ ही कई अमर्यादित बातों का जिक्र भी किया गया है। तहरीर में आजम खान द्वारा कारगिल लड़ाई के संबंध में दिए गए भाषण का कोई उल्लेख नहीं है।
पुलिस ने मंत्री आजम खान के खिलाफ विभिन्न वर्गों में वैमनस्य पैदा करने और लोगों के धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कर ली है। जिलाधिकारी एनपी सिंह ने बताया कि आयोग के निर्देशों के अनुरूप यह कार्रवाई की गई है।
रामपुर और संभल में आजम पर मुकदमा
सूबे के कैबिनेट मंत्री आजम खान जनसभाओं में विवादित भाषण देने के मामले में कानूनी शिकंजे में फंस गए हैं। आचार संहिता का उल्लंघन मानते हुए चुनाव आयोग के आदेश पर उनके खिलाफ रामपुर और संभल जिले में मुकदमा दर्ज कराया गया है। आजम खान पर दो वर्गों के बीच वैमनस्यता पैदा करने और देश की एकता को चोट पहुंचाने समेत कई आरोप लगाए गए हैं।
चुनाव आयोग ने आजम खान के विवादित बयानों का संज्ञान लेते हुए शुक्रवार को उन पर चुनावी सभा, रैली और रोड शो करने पर प्रतिबंध लगा दिया था। साथ ही उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश रामपुर के जिला निर्वाचन अधिकारी को दिए थे। एआरओ के मुताबिक आजम खान ने सात अप्रैल को शहर कोतवाली के किला मैदान में सभा की थी। इसमें नरेंद्र मोदी पर तीखी टिप्पणी की थी। साथ ही अजीतपुर में जनसभा के दौरान प्रशासन को धमकाने का आरोप लगाया गया है।
इधर, संभल में नौ अप्रैल को सपा प्रत्याशी डा. शफीकुर्रहमान बर्क के समर्थन में की गई जनसभा में कैबिनेट मंत्री ने बाबरी मस्जिद, कारगिल युद्ध, नरेंद्र मोदी और अमित शाह को लेकर विवादित बयान दिया था। चुनाव आयोग ने इस बयानबाजी का संज्ञान लिया था। शनिवार को चुनाव आचार संहिता समिति (एमसीसी) प्रभारी/ खंड विकास अधिकारी संभल सतीश कुमार पांडेय ने शहर कोतवाली में आजम खान के खिलाफ 125 लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम-1951 और 1953 ए के तहत मुकदमा दर्ज कराया है।
आजम ने उठाए आयोग के फैसले पर सवाल
चुनाव आयोग के फंदे में फंसने के बाद सूबे के नगर विकास मंत्री आजम खान ने आयोग के फैसले पर सवालिया निशान लगाए हैं। कहा कि आयोग ने उनके जवाब का संज्ञान लेने से पहले ही इस तरह का फैसला लिया है। आयोग को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने एफआईआर दर्ज कराए जाने को भी गलत बताया।
कारगिल युद्ध को लेकर विवादित बयान देने के मामले में चुनाव आयोग ने आजम खान के प्रचार करने पर रोक लगा दी है। साथ ही उनके खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज करा दी गई है। आयोग का आदेश मिलने के बाद आजम खान शनिवार को मीडिया से मुखातिब थे। आजम ने एफआईआर दर्ज कराने के आदेश पर भी सवालिया निशान लगाए। कहा कि प्रशासन ने जो रिपोर्ट भेजी थी उसमें कुछ भी विवादित नहीं था, फिर भी उन पर मुकदमा दर्ज कराया गया।
उन्होंने कहा कि कुछ भी गलत नहीं कहा था। कारगिल युद्ध मुद्दे पर जो भी कहा उसे सेना के कर्नल अजीत सिंह भी 1999 में स्वीकार कर चुके हैं। इसकी सीडी उनके पास है और वह इसे सार्वजनिक करेंगे। कहा कि मुसलमानों ने देश के लिए बहुत कुछ किया, लेकिन फासिस्ट ताकतें उनकी उपेक्षा करती हैं। देश का मुसलमान खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है।
कानूनी लड़ाई लड़ेंगे हम: अखिलेश
प्रदेश के नगर विकास मंत्री आजम खान पर चुनाव आयोग की ओर से जनसभा और रोड शो करने पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि हम कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। आजम खान चुनाव आयोग के सामने अपना पक्ष तो रखेंगे ही, समाजवादी पार्टी और यूपी सरकार भी आयोग के सामने अपनी बात रखेगी।
टांडा में सपा प्रत्याशी नसीर खान के समर्थन में आयोजित जनसभा में मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां तक मेरी जानकारी है चुनाव आयोग ने आजम खान की ओर से भेजे गए जवाब का संज्ञान नहीं लिया है। आयोग को चाहिए कि वह आजम खान के जवाब का संज्ञान ले और सभाओं पर प्रतिबंध लगाने के फैसले पर पुनर्विचार करे।
उन्होंने कहा कि भाजपा यूपी में चुनाव को सांप्रदायिक रूप देने की कोशिश कर रही है। धार्मिक नारों को राजनीतिक किसने बनाया है? सांप्रदायिक होना आसान है, लेकिन सेक्युलर होना नहीं? आजम खान सांप्रदायिक नहीं हैं। विरोधी उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं।