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कोलगेट में दो और कंपनियों पर दर्ज हो सकता है केस

Sun, 28 Oct 2012 08:54 PM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
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सीबीआई को 1993-2004 के दौरान कोल ब्लॉक आवंटन में फायदा उठाने वाली दो कंपनियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिले हैं। जांच एजेंसी इन दोनों के खिलाफ इसी हफ्ते मामला दर्ज कर सकती है। सीवीसी से जांच के आदेश मिलने के बाद सीबीआई द्वारा अपनी प्रारंभिक जांच में दर्ज किए जाने वाला यह पहला मामला होगा।
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सीवीसी ने सीबीआई को 1993 से 2004 के बीच आवंटित कैप्टिव कोल ब्लॉकों की जांच करने को कहा था। इन 11 साल के दौरान लगभग आधे वक्त तक केंद्र में भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए की सरकार थी। वर्ष 2006 से 2009 के बीच आवंटित कैप्टिव कोल ब्लॉक के संदर्भ में जांच एजेंसी पहले ही 9 मामले दर्ज कर चुकी है।

सीबीआई सूत्रों ने कहा कि नए मामलों में मिले प्रथम दृष्टया सबूतों से कुछ सरकारी अधिकारियों की संलिप्तता के भी संकेत मिले हैं। इन अधिकारियों ने विभिन्न स्तरों पर फायदा उठाने वाली कंपनियों के आवेदनों की जांच की थी। 1993-2004 के दौरान फायदा उठाने वाली 24 कंपनियों से मिले दस्तावेजों की जांच कर रही है।
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जांच एजेंसी अलग समूहों में मामले दर्ज करेगी। हालांकि सूत्रों ने इन कंपनियों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी। कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल समेत सात सांसदों ने 1993 से कोल आवंटनों की जांच की मांग की थी।

33 कोल ब्लॉकों के भाग्य का फैसला अगले महीने
कोल ब्लॉकों से संबंधित अंतर मंत्रालयी समूह (आईएमजी) की बैठक नवंबर महीने की शुरुआत में होगी। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को आवंटित 33 कोल ब्लॉकों के भाग्य का फैसला होगा। इन कंपनियों को पहले ही उत्पादन कार्य में देरी के लिए नोटिस जारी किया जा चुका है। आईएमजी की बैठक पहले अक्तूबर महीने के अंत में होनी थी।

कोयला मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि पहले यह बैठक 30 और 31 अक्तूबर को निर्धारित थी लेकिन अब यह 5-6 नवंबर को होगी। आईएमजी 5 नवंबर को छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम और आंध्र प्रदेश पॉवर जनरेशन निगम आदि को आवंटित 13 कोल ब्लॉकों के संदर्भ में अपनी सिफारिश देगा।

इसके अलावा 6 नवंबर को नाल्को और एमएमटीसी जैसे पीएसयू को आवंटित 20 ब्लॉकों के संदर्भ में अपनी सिफारिश करेगा। हाल ही में कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा था कि निजी कंपनियों को आवंटित कोल ब्लॉकों की समीक्षा पूरी कर चुका है।
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