चीन के सरकारी अख़बार ने भारत के 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम की खिल्ली उड़ाई है और निवेशकों को दक्षिण एशियाई देश के "ख़राब बुनियादी ढांचे" से आगाह किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत को एक वैश्विक उत्पादन का बड़ा केंद्र बनाने की कोशिश में जुटे हैं। इसी को ध्यान में रख कर सितंबर महीने में उन्होंने 'मेक इन इंडिया' अभियान की शुरुआत की। विश्लेषकों का मानना है कि चीन प्रधानमंत्री मोदी के इस अभियान को मुक़ाबले के रूप में देख रहा है।
कुछ चीनी अख़बारों ने भारत के आर्थिक विकास पर संदेह जाहिर किया है. प्रधानमंत्री मोदी के अभियान की आलोचना कहते हुए पीपुल्स डेली ने एक लेख छापा है।
लेख में हैरानी जताई गई है कि भारत अपने 'पिछड़े बुनियादी ढांचे' के दम पर कैसे 'वैश्विक कारख़ाना' बन सकता है। लेख में कहा गया है, "भारत वैश्विक दफ़्तर के रूप में जाना जाता है. वे ज़रूर असहाय हैं क्योंकि वे इसे बदल कर ख़ुद को वैश्विक कारख़ाना बनाना चाहते हैं।"
अख़बार ने इस ओर ध्यान दिलाया है कि साल 2013 में दुनिया के निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 'केवल 1.7 फ़ीसदी रही जो चीन के 11 फ़ीसदी से काफ़ी कम है।'