संसद में पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की एक रिपोर्ट ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की मुश्किल बढ़ा दी है। कैग ने अपनी रिपोर्ट में नागपुर स्थित पूर्ति साखर कारखाना लिमिटेड कंपनी को भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (इरेडा) द्वारा 48.65 करोड़ रुपये का टर्म लोन दिए जाने में नियमों के उल्लंघन की बात कही है।
कंपनी में नितिन गडकरी को एक प्रमोटर और निदेशक के रूप में दर्शाया गया है।
कांग्रेस ने मामले की न्यायिक जांच होने तक गडकरी से अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि गडकरी और उनके परिवार के पूर्ति कंपनी से करीबी संबंध हैं।
पूर्ति समूह की कंपनी पूर्ति पावर एंड सुगर ने आरोपों का खंडन किया है। इरेडा ने मार्च 2002 में पूर्ति साखर कारखाना को महाराष्ट्र के नागपुर में 22 मेगावाट के को-जेनरेशन पावर प्रोजेक्ट को लगाने के लिए 48.65 करोड़ रुपये के लोन को मंजूरी दी थी।