सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी भी मसले पर कैग रिपोर्ट को ही सब कुछ नहीं माना जा सकता। कोर्ट के अनुसार कैग रिपोर्ट का सम्मान किया जाना चाहिए। इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। लेकिन इसे ही सब कुछ मान लेना लाजिमी नहीं है।
जस्टिस केएस राधाकृष्णन और दीपक मिश्र की पीठ ने बृहस्पतिवार को कहा कि कैग के खुलासे को हलके में नहीं लिया जा सकता क्योंकि यह संसद की जांच और बहस का हिस्सा होता है।
अदालत ने कहा कि कैग रिपोर्ट हमेशा संसद में बहस का मसला रही है। लेकिन सार्वजनिक लोक लेखा समिति (पीएसी) मंत्रालयों की तरफ से कैग रिपोर्ट पर उठी आपत्तियों को स्वीकार कर सकती है या रिपोर्ट को खारिज कर सकती है।
अदालत ने कहा कि कैग निर्विवाद रूप से एक स्वतंत्र और संवैधानिक संस्था है। लेकिन यह संसद पर निर्भर करता है कि वह इसकी रिपोर्ट को स्वीकार करे या इस पर अपनी राय दे।
पीठ ने केयर्न वेदांता सौदे पर कैग के विचार को खारिज करते कहा कि इससे संबंधित रिपोर्ट तथ्यात्मक और वैधानिक रूप से गलत है, इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने कैग की कार्यप्रणाली से संबंधित विभिन्न प्रावधानों पर विवेचना भी की।