अवैध खनन के मामले में कैग ने उत्तर प्रदेश सरकार की जमकर खिचांई की है। उत्तर प्रदेश को अवैध खनन से 1400 करोड़ रुपये का चूना लगा है।
अवैध खनन से उत्तर प्रदेश सरकार को अरबों रुपये का घाटा हो रहा है। पिछले सात सालों के दौरान उत्तर प्रदेश में अवैध खनन इतना बढ़ गया है कि सरकार को 1400 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। भारत के महालेखा एवं परीक्षक नियंत्रक ने अपनी हालिया रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की है।
कैग की तरफ से किए गए ऑडिट में 21 जिलों को शामिल किया गया है। इन जिलों में मिर्जापुर, सोनभद्र, वाराणसी, ललितपुर, बुंदेलखंड समेत कुछ अन्य को शामिल किया गया है। कैग ने उत्तर प्रदेश को होने वाले राजस्व घाटे की रिपोर्ट को दिसंबर, 2012 में ही सौंप दिया था। पर एक प्रभावशाली नौकरशाह के चलते यह रिपोर्ट धूल खाती रही।
कैग की ड्राफ्ट रिपोर्ट के अनुसार हद से ज्यादा अवैध खनन किया गया है। उदाहरण के लिए मिर्जापुर में 6,000 मीट्रिक टन खनन करने की इजाजत थी जबकि खनन करने वाले लीज होल्डर ने 3,10,500 मीट्रिक टन खनन कर डाला। इसी तरह झांसी में 12,000 मीट्रिक टन खनन की इजाजत थी जबकि लीज होल्डर ने 1,42,520 मीट्रिक टन का खनन कर डाला।
खनन करने वाले लोगों ने बाराबंकी, चंदौली और मथुरा में वर्ष 2007 के बाद से लाइसेंस को दोबारा रिन्यूवल तक नहीं कराया था। इसके अलावा राज्य स्तर से अवैध खनन करने वाले लोगों की जांच को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई। कई इलाकों में बिना वन विभाग की एनओसी के ही खनन के लिए लाइसेंस दे दिया गया।