देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही गुजरात के विकास पर बड़ी बड़ी बातें करते हों, लेकिन भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ताजा रिपोर्ट इन सभी दावों का खंडन करती है। कैग ने गुजरात के विकास मॉडल पर कई बड़े सवाल खड़े किए हैं।
यह रिपोर्ट कृषि विकास, सोशल इंडीकेटर, सोशल इंफ्रास्टक्चर, राजकोषीय अनुशासन, शिक्षा का अधिकार, और कानून एवं व्यवस्था की स्थिति को लेकर किए गए गुजरात सरकार के तमाम दावों को झुठलाती है।
कैग की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 11वीं पंचवर्षीय योजना (2007-12) में गुजरात का औसत वार्षिक कृषि विकास 5.49% जो कि संपूर्ण भारत के औसत वार्षिक कृषि विकास 4.06% से बेहतर था।
हालांकि साल 2012-13 में जीडीपी में कृषि की हिस्सेदारी की दर नकारात्मक (-6.96%) थी। यह 12वीं पंचवर्षीय योजना के पहले साल में पिछले साल 2010-11 की तुलना में यानी साल 21.64% थी वहीं साल 2011-12 में यह 5.02% फीसदी के आस पास थी।