केंद्र सरकार सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) में विवादास्पद संशोधन के अपने कदम से पीछे हट गई है। केंद्रीय कैबिनेट की बृहस्पतिवार को हुई बैठक में आरटीआई को ज्यों का त्यों रखने का फैसला किया गया है। इससे पहले सरकार की ओर से पेश संशोधन में फाइलों की नोटिंग संबंधी सूचना को प्रतिबंधित करने का सुझाव दिया गया था।
आए दिन आरटीआई से होने वाले भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और सरकारी व्यव्स्था के दुरूपयोग के खुलासों से सरकार परेशान हो गई थी। जिसके बाद कहा जाने लगा कि मौजूदा आरटीआई से सरकारी कामकाज में रूकावटें आ रही हैं। फिर इसमें संशोधन की बात होने लगी थी।
कई मौकों पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी कहा था कि आरटीआई का दुरुपयोग किया जा रहा है, जिससे सरकारी कामकाज में बाधा उत्पन्न हो रही है। उन्होंने भी इस कानून की समीक्षा किए जाने की बात कही थी। जिसके बाद सरकार की ओर से इस कानून में संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। जिसके तहत फाइलों की नोटिंग संबंधी सूचना को प्रतिबंधित करने, सूचना आयुक्तों को और काम देने जैसे बदलाव होने थे।
सिविल सोसायटी और विपक्षी दलों ने इस कानून में संशोधन का काफी विरोध भी किया था।