संसद का सत्र बुलाने की संभावना के बीच केंद्रीय मंत्रिमंडल में इसी महीने फेरबदल होने की संभावना बन रही है।
सूत्रों के मुताबिक, फेरबदल में दो से तीन मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है।
हालांकि, मंत्रियों को घोटाले के बजाय राजनीतिक और प्रशासनिक कारणों से बाहर किया जा सकता है। कुछ नए चेहरों को जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है।
माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मंत्रिमंडल में नौ या दस नए मंत्री जगह पा सकते हैं। कांग्रेस और सरकार के शीर्ष स्तर पर खाली पड़े पदों को जल्द भरने को लेकर बातचीत प्रक्रिया शुरू हो गई है।
हालांकि, प्रधानमंत्री ने इस साल की शुरुआत में किए मंत्रिमंडल फेरबदल को आखिरी बदलाव कहा था। मगर बदले राजनीतिक घटनाक्रम के चलते उन्हें फिर फेरबदल करना पड़ रहा है।
सहयोगी दल द्रमुक के सरकार से अलग होने के बाद कई मंत्री पद खाली पड़े हैं। वहीं रेलवे घूस कांड में पवन बंसल के रेल मंत्री की कुर्सी छोड़ने और कोयला घोटाले मामले में अश्विनी कुमार की कानून मंत्रालय से विदाई के चलते भी प्रधानमंत्री को अपने मंत्रियों के काम में फेरबदल की जरूरत पड़ गई हैं।
द्रमुक कोटे के मंत्री रहे एमके अलागिरी के जाने के बाद रासायनिक उर्वरक मंत्रालय खाली पड़ा है। जबकि उससे पहले दयानिधि मारन को टेलीकॉम विवाद में फंसने के चलते कपड़ा मंत्रालय से जाना पड़ा था। यह पद लंबे समय से खाली पड़ा है।
जहां तक रेल मंत्री सीपी जोशी के बने रहने की बात है, उनके पास से सड़क और परिवहन मंत्रालय लेने की चर्चा है।
कानून मंत्री की कुर्सी पर कपिल सिब्बल के बरकरार रहने के अलावा दूरसंचार एवं सूचना तकनीक मंत्रालय भी उनके पास रहने की चर्चा चल रही है। इसके अलावा कई राज्य मंत्री पद भी खाली पड़े हैं।