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जघन्य अपराधों में किशोर को होगी वयस्क जैसी सजा

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जघन्य अपराध में शामिल किशोर गुनहगार को अब कम उम्र होने का लाभ नहीं मिलेगा। कैबिनेट ने 16 से 18 वर्ष के बीच के किशोरों के जघन्य अपराध को बालिगों की तरह मानने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है।
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जघन्य अपराध में शामिल किशोर को वयस्कों को अपराधी मानने वाले बहु प्रतीक्षित किशोर न्याय अधिनियम 2014 संशोधन बिल पर कैबिनेट ने अपनी मुहर लगा दी है।

केंद्र सरकार ने इस फैसले के साथ ही दुष्कर्म, हत्या और तेजाब हमले जैसे गंभीर मामलों में 16-18 साल के किशोर को वयस्क की तरह कड़ी सजा देने पर अंतिम निर्णय ले लिया है। सरकार संसद के मौजूदा सत्र में ही इस बिल को पेश करेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस बिल को हरी झंडी दी गई। हालांकि इससे पहले 8 अप्रैल को कैबिनेट में इस बिल पर चर्चा हुई थी।
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लेकिन कुछ मामलों पर आम राय नहीं होने के कारण अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका था। किशोर अपराधी बालिगों की तरह सजा पूरी करने के बाद चुनाव न लड़ सके। इस पर फैसला अब तक नहीं हुआ था।
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वयस्क जेल में नहीं रखा जाएगा

सजायाफ्ता किशोर को वयस्क अपराधियों के साथ जेल में नहीं रखा जाएगा। बल्कि उनके कारावास के लिए अलग और विशेष व्यवस्था होगी।

वहीं 21 साल की आयु होने पर बाल अपराधी की मानसिक स्थिति की समीक्षा कर यह देखा जाएगा कि आगे उस पर किस तरह की कार्रवाई हो। अगर उसकी मानसिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव नजर आया तो 21 साल में उसे रिहा भी किया जा सकता है।

सजा के तरीके पर फैसला जेजे बोर्ड के हाथ

नए कानून के प्रस्तावित मसौदे के मुताबिक जघन्य अपराध के मामले में किशोर को किस तरह दंडित किया जाएगा इसका निर्णय जेजे बोर्ड को लेगा। जेजे बोर्ड में मनोवैज्ञानिक, बाल अधिकार से जुड़े एनजीओ, कानूनविद् जैसे तमाम पक्षकारों को शामिल किया गया है।

अगर बोर्ड बाल अपराधी को सुधार गृह में रखने की जगह सामान्य अपराधियों की तरह कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लेता है तो उस पर अमल किया जाएगा।
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