उम्मीदों के अनुरूप केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों की रोकथाम संबंधी आपराधिक कानून संशोधन विधेयक को महज 12 मिनट में अपनी मंजूरी दे दी।
कड़े प्रावधानों के कारण तीखे विरोध का सामना कर रहे इस विधेयक को कानूनी जामा पहनाने के लिए संसद में पेश करने से पहले सरकार 18 मार्च को सर्वदलीय बैठक में अन्य दलों का विरोध खत्म करने का प्रयास करेगी।
हालांकि बीते मंगलवार की तरह बृहस्पतिवार की मंत्रिमंडल की बैठक में भी महिला एवं बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ से सहमति से सेक्स की उम्र 18 से घटा कर 16 वर्ष किए जाने का विरोध किया।
गौरतलब है कि विधेयक में तय कड़े प्रावधानों मसलन महिला का पीछा करने, अश्लील इशारा करने, अश्लील एसएमएस या एमएमएस भेजने तथा घूरने जैसे अपराध को गैरजमानती बनाने के तीखे विरोध के कारण इससे पहले हुई मंत्रिमंडल की दो बैठकों में सहमति नहीं बन पाई थी।
बीते मंगलवार की बैठक में भी भारी मतभेद सामने आने के बाद प्रधानमंत्री ने सहमति का रास्ता निकालने के लिए वित्त मंत्री पी चिदंबरम के नेतृत्व में मंत्रिमंडलीय समूह (जीओएम) का गठन किया था।
जीओएम ने दो बैठकों में सारे मतभेद दूर करने का दावा करते हुए विधेयक का मसौदा मंत्रिमंडल में पेश कर दिया। हालांकि जीओएम ने मंत्रिमंडल के सदस्यों की लगभग सारी आपत्तियां दरकिनार कर दी थीं।
बैठक में पहले प्रावधानों का विरोध कर चुके ज्यादातर सदस्य तो चुप रहे, लेकिन कृष्णा तीरथ ने सहमति से सेक्स की उम्र कम करने का फिर विरोध किया।
सूत्रों के मुताबिक तीरथ ने कहा कि इस पर लगभग सभी दलों को एतराज है, ऐसे में संसद में इस विधेयक को पारित करवाने में परेशानी आएगी। इस पर चिदंबरम ने उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार इस प्रावधान पर विपक्षी दलों को मना लेगी।
उधर तमाम विरोध के बावजूद कैबिनेट ने तो इस कानून संशोधन विधेयक को मंजूरी तो दे दी है, लेकिन इसके कानूनी जामा पहनने की राह आसान नहीं है।
सरकार के सहयोगी दल सहित कई प्रमुख विपक्षी दलों को भी विधेयक में तय किए गए कड़े प्रावधानों पर सख्त एतराज है। मंत्रिमंडल के सदस्यों की तरह ही कई दलों के नेताओं का मानना है कि कड़े प्रावधानों तथा यौन अपराधों को परिभाषित करने की अस्पष्टता के कारण इस कानून का व्यापक दुरुपयोग होगा।
खास तौर पर ताकझांक, पीछा करने, अश्लील इशारा करने, अश्लील एसएमएस या एमएमएस भेजने तथा घूरने जैसे अपराधों को गैरजमानती बनाए जाने को कई दल अतार्किक मान रहे हैं।
इनका कहना है कि ऐसे अपराधों को गैरजमानती बनाने से कई तरह की समस्या उत्पन्न होगी। ऐसे में 18 मार्च की सर्वदलीय बैठक में सभी दलों का रुख सामने आने के बाद ही इस विधेयक के भविष्य के संबंध में भविष्यवाणी की जा सकती है।
अध्यादेश द्वारा जारी किए जाने वाले इस कानून के लिए इस सत्र के प्रथम चरण में ही इसे विधेयक की शक्ल में संसद में पेश कर मंजूरी लेना सरकार की मजबूरी है। अगर सरकार ऐसा नहीं कर पाई तो 45 दिन की तय समय सीमा बीत जाएगी और अध्यादेश अपने आप रद्द हो जाएगा।
‘सहमति’ की उम्र 16
-नए प्रस्तावों के तहत ‘सहमति’ से यौन संबंध बनाने की किशोरवय 18 से घटा कर 16 साल कर दी गई है। ऐसे में 16 वर्ष से कम आयु की उम्र में सहमति से बनाया गया संबंध बलात्कार की श्रेणी में आएगा। हालांकि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को इस पर आपत्ति है।
-मुश्किल ये हैं: देश में विवाह की उम्र लड़कियों के लिए 18 और लड़कों के लिए 21 वर्ष है। 16 वर्ष के किशोर को ‘वयस्क’ फिल्म देखने की भी पात्रता नहीं है। इस उम्र में शराब पीने की भी इजाजत नहीं है। फिर यौन संबंध पर सहमति की उम्र क्यों घटे?
गौर करें, ये हैं गैर जमानती
- संशोधन विधेयक के अनुसार किसी महिला का पीछा करना, उसे छुप कर देखना, घूरना/निहारना, छींटाकशी करना, अश्लील एसएमएस या एमएमएस भेजना अपराधों की श्रेणी में आएंगे और इन मामलों में की गई शिकायत पर जमानत भी नहीं मिलेगी।
-मुश्किल ये है: पीछा करना और घूरना जैसी शिकायतें महिला के कहने भर से दर्ज होंगी। ट्रेफिक जाम में अगर आपकी कार किसी महिला की कार के पीछे है और आप उसे देख रहे हैं कि वह आगे बढ़े तो आप भी बढ़ें। ऐसे में महिला आपकी शिकायत कर सकती है। ‘फंसाने वाली’ शिकायतों पर महिलाओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी।
यौन उत्पीड़न नहीं ‘बलात्कार’
-विधेयक में यह बात मंजूर कर ली गई है शिकायत में ‘यौन उत्पीड़न’ की जगह पर ‘बलात्कार’ (रेप) शब्द का ही इस्तेमाल किया जाएगा। महिला संगठन इस बात पर जोर दे रहे थे। इसका मतलब है कि पीड़ित हर सूरत में महिला ही होगी।
मुश्किल ये है: ‘यौन उत्पीड़न’ शब्द खारिज कर दिए जाने के बाद पुरुष यौन अपराधों में पीड़ित के दायरे से बाहर रहेंगे। वे ‘बलात्कार’ की शिकायत नहीं कर सकते। जबकि खुद महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 2011 अपने मसौदे में इस बदलाव की हिमायत की थी।
अब सजा हुई सख्त
-नए महिला सुरक्षा कानून के प्रस्तावों के मुताबिक महिला से बलात्कार, तेजाब फेंकने और नाबालिग से दुष्कर्म करने पर न्यूनतम 20 साल और अधिकतम उम्र कैद की सजा होगी। पहले बलात्कार में न्यूनतम सजा सात साल की थी।
-अधिकार के पद पर बैठा कोई व्यक्ति बलात्कार करता है, तो उसे आखिरी सांस तक जिंदगी जेल में बितानी होगी। अधिकार के पदों में पुलिस अफसर, सशस्त्र बल के अधिकारी, डॉक्टर, अस्पताल का स्टाफ, जेलर और रिमांड होम का वार्डन शामिल हैं।