कोल ब्लॉक के बंदरबांट पर सड़क से लेकर संसद तक मचे कोहराम के बाद आखिरकार आवंटन नीति को मंजूरी मिल गई है।
ब्लॉक आवंटन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए मंगलवार को कैबिनेट ने नई नीति को अपनी मंजूरी दे दी है।
नई नीति के बाद निजी सीमेंट, स्टील और बिजली कंपनियों को कोयला ब्लॉक का आवंटन केवल नीलामी प्रक्रिया से ही संभव हो सकेगा।
यह घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाने और सस्ती दरों पर बिजली मुहैया कराने में भी मददगार होगा।
कैबिनेट में नई आवंटन नीति पर मुहर लगने के बाद कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा कि नई नीति के आधार पर ब्लॉक को प्रतिस्पर्धी नीलामी प्रक्रिया के आधार पर आवंटित किया जाएगा।
यह नीति नीलामी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने का सर्वोच्च तरीका है। इससे बेहतर कोई भी योजना नहीं हो सकती है।
उन्होंने कहा कि कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब साफ हो गया है कि भविष्य में ब्लॉक आवंटन नीलामी प्रक्रिया में भाग लिए बगैर संभव नहीं हो सकेगा।
इससे सरकार के पास कंपनी की क्षमता और उसकी वित्तीय स्थिति के बारे में पूरी जानकारी रहेगी।
नई नीति से बिजली कंपनियों को बिजली दर को रियायती बनाने में भी मदद मिल सकेगी। जबकि ईंधन की दिक्कत से जूझ रही कंपनियों को समय पर कोयला उपलब्ध कराने में भी मदद मिल सकेगी।
नई नीति के मुताबिक कंपनियों को कोल ब्लॉक खोजने के लिए 2 वर्ष का समय दिया जाएगा। जबकि ब्लॉक के विकास के लिए 5 साल की अवधि तय की गई है।
कोल ब्लॉक की नीलामी से पहले पर्यावरण मंत्रालय इसकी समीक्षा करेगा। मंत्रालय की सहमति से ही कोल ब्लॉक पर काम शुरू हो सकेगा।
यह पहली दफा है जब सरकार ने आवंटन नीति को तैयार किया है। यही वजह है कि अब तक कोल ब्लॉक आवंटन से जुड़ी गड़बड़ियों को लेकर सरकार को तमाम आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा है।
जबकि संसद के मानसून सत्र में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी विपक्ष ने सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया था।