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मुआवजे के लिए खुद ही जला दीं दुकानें

Mon, 28 Jul 2014 01:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
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सहारनपुर शहर में शनिवार को हुए दंगे में उपद्रवियों ने कई लोगों की दुकानें और आशियाने फूंक दिए। इसका दंश वे ताउम्र झेलेंगे। हादसों में चोटिल होकर अस्पताल पहुंचकर दंगे में पिटाई और हमले की कहानी बताई। उधर, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि बिना जांच के किसी को भी मुआवजा नहीं मिलेगा। इन सबके बीच कुछ ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने दंगे के बाद सरकारी मुआवजा पाने के लिए अपनी दुकानों, आशियानों में खुद ही आग लगा दी।
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ऐसा पहला नजारा कुतुबशेर थाने के सामने दिखा। वहां कुछ लोगों ने अपनी दुकानों के सामने पड़े टायरों को जला दिया और भाग गए। आग से दुकान भी जल गई। दूसरा मामला कोर्ट रोड का है। वहां एक टेलर की दुकान जली । हल्ला मचा कि दुकान में दूसरे समुदाय के लोगों ने आग लगा दी। फायर बिग्रेड ने आग शार्ट सर्किट से लगने की संभावनाएं जताई हैं। दुकान के शटर के ताले भी उन्होंने ही आकर खोले।

अस्पताल में शनिवार को दो ऐसे युवक घायल अवस्था में पहुंचे। उनके घुटनों और हाथों पर चोट लगी थी। चिकित्सकों ने पूछा तो बताया कि कुछ लोगों ने घेर लिया और उन्हें मारा-पीटा गया, लेकिन चोट को देखने के बाद चिकित्सकों ने इसे सड़क हादसा बताया। अन्य युवक भी बोल पड़े कि वे तो बाइक से गिरे थे। कर्फ्यू में मोहल्ले से निकले थे, लेकिन पुलिस को देखकर डर गए और बाइक दौड़ाते वक्त गिरे। पूछा गया कि झूठ क्यों बोला तो हंसते हुए बोले कि दंगे के घायलों को सरकार मुआवजा तो देगी । उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार ने सहारनपुर दंगे में मारे गये लोगों के परिजनों को 10-10 लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपये देने की घोषणा की है।     
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बिना जांच नहीं दिया जाएगा मुआवजा
एडीएम (वित्त) सैयद निजामुद्दीन ने बताया कि बिना जांच किसी को भी मुआवजा नहीं दिया जाएगा। इसके लिए बाकायदा समिति का गठन होगा, जो दंगे में मरने वाले और घायलों की जांच करेगी।

अफवाहों के चलते दौड़ती रहीं पुलिस की गाड़ियां

कर्फ्यू लगने के बाद भी दंगे की आग शांत नहीं हो पा रही है। पीएसी और अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती के बावजूद भी दंगाई दुकानों में आगजनी और लूटपाट करते रहे। कई वाहनों को भी आग लगा दी गई।  कई स्थानों पर गश्ती पुलिस की गाड़ियों पर पथराव किया गया। अफवाहों के चलते पुलिस की गाड़ियां लगातार इधर से उधर दौड़ती रही।

शनिवार को भड़के दंगे पर नियंत्रण पाने के लिए पुलिस के अलावा भारी संख्या में अर्द्धसैनिक बल और पीएसी के जवान तैनात किए गए हैं, लेकिन पुलिस प्रशासन के तमाम प्रयास दंगाइयों को नहीं रोक पा रहे हैं। दंगाई रात के अंधेरे में ही नहीं, बल्कि दिन के उजाले में भी जहां मौका लग रहा है, वारदात कर रहे हैं। शनिवार के बाद रविवार को भी दिन में  दिल्ली रोड हसनपुर क्षेत्र में दंगाइयों ने एक सैलून में तोड़फोड़ कर आग लगा दी तो नुमाइश कैंप में भी कई दुकानों में आगजनी की गई। यहां सड़क एक ट्रक और टाटा मैजिक गाड़ी में भी तोड़फोड़ कर आग लगाई। सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंची तो दंगाई भाग निकले।

रात भर जागते रहे डरे सहमे लोग
दंगे से लोग इस कदर सहमे हैं कि उनकी आंखों से नींद गायब हो गई और दिन शहर के हालात जानने में बीत रहा है। पुलिस की नाकाबंदी और गश्त के बाद भी लोग रात में जागकर अपने गली मोहल्ले में पहरा दे रहे हैं। दंगे का दंश झेल रहे शहर के लोग पूरी तरह डरे सहमे हैं। खासकर पुराने शहर के गली मोहल्लों और कॉलोनियों में तो लोग पूरी रात जागकर काट रहे हैं। रात के अंधेरे में खुरापाती कोई खुरापात न कर दें। इसके लिए गलियों में पहरे दे रहे हैं। हालांकि रात में भी पुलिस की गाड़ियां क्षेत्रों में लगातार गश्त कर रही है। दिन निकलते ही लोग शहर के दूसरे क्षेत्रों में रहने वाले रिश्तेदारों और परिचितों को फोन कर उनके क्षेत्र के हालात की जानकारी ले रहे हैं।
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दंगाइयों पर कार्रवाई न हुई तो पंजाब पहुंचेगा मामला

गुरुद्वारा रोड पर विवादित स्थल पर निर्माण को लेकर शनिवार से भड़के दंगे के बाद कर्फ्यू के बीच रविवार दोपहर को अमृतसर से अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह, आल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन के अध्यक्ष सरदार परमजीत सिंह खालसा सहित पांच सदस्यीय दल सहारनपुर पहुंचा। कड़ी सुरक्षा और निगरानी के बीच गुरुद्वारा सिंह सभा में ही जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने सिख समाज का दर्द सुना। पीड़ा सुनने के बाद उन्होंने सिख समाज को आश्वस्त किया गया कि यदि दंगाइयों पर कार्रवाई नहीं हुई और पीड़ितों को मुआवजा और न्याय न मिला तो यह मामला पंजाब के मुख्यमंत्री तक पहुंचेगा। इसकी तैयारी हो चुकी है।

गुरु सिंह सभा के प्रधान बलबीर सिंह धीर, हरजिंदर चावला, नरेंद्र कोहरी, रणजीत, गुरविंदर आदि ने कहा कि उक्त स्थान पर धर्मस्थल की अनुमति होने के बावजूद  निर्माण नहीं करने दिया गया। शनिवार तड़के ही एक समुदाय के करीब 10 से 15 हजार लोगों ने अवैध हथियारों से लैस होकर हमले किए और बाद में यह बवाल शहर तक फैल गया। दर्जनों वाहन फूंके। सैकड़ों प्रतिष्ठान आग के हवाले किए। करोड़ों का कारोबार तबाह कर दिया। समाज के कुछ लोगों ने प्रस्ताव रखा कि जिला प्रशासन दंगा प्रभावित क्षेत्रों में ही सभी घरों के सर्वे कराए और अवैध हथियारों का पता लगाकर कार्रवाई करे।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन की ढील के कारण शहर में दंगा हुआ। यदि हिंदू समाज साथ न देता तो बर्बादी और बढ़ गई होती। जत्थेदार ने कहा कि दंगाइयों पर कार्रवाई होने और पीड़ितों को जरूरी राहत के कदम उठाने तक कर्फ्यू न हटाया जाए। यदि ऐसा नहीं होता है तो पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से संपर्क कर आगे का कदम उठाना पड़ेगा।     

शहर में कितने सिखों ने किया प्रवेश?
शहर में रविवार को यह चर्चाएं भी खूब रहीं कि पंजाब और हरियाणा के शहरों से गुपचुप तरीके से काफी संख्या में सिख समाज के लोग आए हैं। इनकी संख्या भी पांच से आठ हजार तक बताई गई। इस बारे में जब सिख समाज के कुछ नेताओं से पूछा गया तो उन्होंने इससे इंकार किया। उन्होंने कहा कि समाज की ओर से अभी ऐसा कुछ नहीं किया गया है। यह सिर्फ अमन चैन बिगाड़ने की नीयत से चंद लोगों की ओर से फैलाई गई अफवाहें हैं।
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