केंद्र में नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार बनने की बढ़ती संभावना ने शीर्ष नौकरशाही ने हड़कंप मचा दिया है। कैबिनेट सचिव, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) पद के लिए नामों पर चर्चा शुरू हो गई है।
हालांकि अफसरशाही के बड़े तबके का मानना है कि मोदी के मिजाज के देखते हुए इस मामले में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
सूत्रों के मुताबिक नार्थ और साउथ ब्लॉक में बैठने वाले कई सचिवों और अफसरशाहों ने भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली और नितिन गडकरी से मुलाकात भी की है।
रिजर्व बैंक के गवर्नर पद पर होगी नजर
माना जा रहा है कि मोदी सरकार की नजर रिजर्व बैंक के गवर्नर पद पर भी होगी। नई सरकार के साथ काम नहीं करने के इच्छुक कई अफसरशाहों ने विदेश की पोस्टिंग के लिए भी जोड़ तोड़ शुरू कर दी है।
कैबिनेट सचिव के लिए देश के सबसे वरिष्ठ अफसरशाह सुतानु बेहुरिया और एनएसए के लिए दो पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल और श्याम शरण का नाम चर्चा में है।
इस पद के लिए खुफिया एजेंसी रॉ के पूर्व प्रमुख संजीव त्रिपाठी और आईबी के पूर्व निदेशक अजीत डोभाल के नाम के कयास भी लगाए जा रहे हैं। डोभाल वाजपेयी सरकार में आईबी के निदेशक थे।
गुजरात के अधिकारी आएंगे दिल्ली
सूत्रों के मुताबिक मोदी ने कभी दिल्ली की राजनीति नहीं की, लिहाजा अफसरशाही में निजी तौर पर किसी को नहीं जानते। अपने प्रमुख सचिव के लिए वह गुजरात के उन अफसरशाहों को चुनना चाहेंगे, जिनके साथ उनके पुराने संबंध हैं।
इसके लिए 1972 बैच के गुजरात के पूर्व मुख्य सचिव पी के मिश्रा का नाम ऊपर माना जा रहा है। मिश्रा 2002 से 2004 की बीच गुजरात के मुख्य सचिव रहे।
पीएम के प्रमुख सचिव के लिए मोदी के प्रिंसिपल सेक्रेटरी रहे के कैलाशनाथन का नाम भी प्रतिस्पर्धा में माना जा रहा है। मोदी की नजर रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन पर भी होगी।
मनपसंद अधिकारी बैठेंगे सचिवालय में
अमेरिका में आईएमएफ के साथ काम कर रहे रघुराम को वित्त मंत्री पी चिंदबरम ने वापस बुलवाया था। आने वाले कुछ महीनों में कम से कम आधा दर्जन मंत्रालयों के सचिव का पद खाली होने वाले हैं।
इन पदों पर मनपसंद अधिकारियों को बैठाना भी नई सरकार की अहम जिम्मेदारी होगी।