नई सरकार बनने के बाद ब्रांडेड पेट्रोल, डीजल के दाम में कटौती हो सकती है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर तैयार की गई नई ऑटो फ्यूल पॉलिसी पर आगामी सरकार की मुहर लगते ही प्रीमियम और स्टैंडर्ड पेट्रोल, डीजल के उत्पाद शुल्क का अंतर पूरी तरह से खत्म हो जाएगा।
स्टैंडर्ड और प्रीमियम ईंधन के दाम में अंतर होने के कारण फिलहाल ब्रांडेड उत्पाद के खरीदार कम हैं। यही वजह है कि तेल कंपिनयों ने इसे तैयार करना लगभग बंद कर दिया है।
ब्रांडेड पेट्रोल और डीजल के दाम में कटौती
डीलरों की माने तो उनकी मांग पर तेल कंपनियां पेट्रोल पंपों पर ब्रांडेड इंधन मुहैया कराती हैं। उम्मीद की जा रही है कि उत्पाद शुल्क का अंतर खत्म होने से ब्रांडेड पेट्रोल, डीजल की बिक्री बढ़ेगी।
मौजूदा समय में सामान्य पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 9.20 रुपये प्रति लीटर है जबकि ब्रांडेड पेट्रोल पर 15.50 रुपये प्रति लीटर शुल्क लगाया जाता है।
इसी तरह सामान्य डीजल पर उत्पाद शुल्क 3.46 रुपये और ब्रांडेड डीजल पर यह करीब ढाई रुपये प्रति लीटर अधिक है। यही वजह है कि ग्राहक ब्रांडेड ईंधन को खरीदने से कतराते हैं।
80 हजार करोड़ का अतिरिक्त बोझ
पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि नई नीति से स्वच्छ और ज्यादा बेहतर ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि योजना आयोग के सदस्य सौमित्र चौधरी की अध्यक्षता वाले पैनल ने 2017 तक देश में बीएस चार पेट्रोल और डीजल के इस्तेमाल की सिफारिश की है।
इसमें 2020-21 तक देश में बीएस पांच ईंधन के इस्तेमाल को पूरी तरह से अनिवार्य करने का उल्लेख है। महत्वपूर्ण यह है कि पैनल की सिफारिशों को लागू करने पर रिफानरियों पर करीब 80 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका है।