कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर कुर्सी पर पहुंचने का ख्वाब देख रही भारतीय जनता पार्टी और उसके पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी को हालिया वक्त तक आम आदमी पार्टी की तरफ से चुनौती मिलती दिख रही थी।
लेकिन अब ये चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। हर बार की तरह इस दफा भी चुनावों से पहले तीसरा मोर्चा आकार लेने की कोशिश कर रहा है, जो चुनावों के बाद कोई भी रंग दिखा सकता है। लेकिन इस बीच तीसरे मोर्चे से दूर खड़ी उत्तर प्रदेश की राजनीतिक ताकत मायावती ने मोदी को तगड़ा झटका दिया है।
हाल तक बहुजन समाज पार्टी नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी भाजपा पर कोई खास हमला नहीं कर रही थी। लखनऊ में हुई मायावती की रैली में कुछ शब्दबाण जरूर छोड़े गए, लेकिन फोकस मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी और यूपी की अखिलेश सरकार पर रहा। लेकिन आज उन्होंने अपने हमलों का मुंह कहीं और घुमा दिया।
तीसरे मोर्चे से नहीं जुड़ेंगी मायावती!
वाम दलों की अगुवाई में तीसरे मोर्चे को लेकर सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं और समाजवादी पार्टी का कहना है कि आने वाले वक्त में इसी मोर्चे का भविष्य है, क्योंकि देश की जनता कांग्रेस और भाजपा से त्रस्त आ चुकी है।
लेकिन मायावती अब तक इस समूह से दूर रही हैं और आज जब वह लोकसभा चुनावों से पहले के राजनीतिक समीकरणों पर खुलकर बोलीं, तो इसकी वजह भी बता दी कि तीसरे मोर्चे से उनकी दूरी की वजह आखिर है क्या?
मायावती ने कहा, "जिस तीसरे मोर्चे की बात आप कर रहे हैं, वह बनता है और तीन-चार दिन बाद ही कुछ राजनीतिक दल इससे खिसक जाते हैं। ऐसे में यह साफ है कि इस मोर्चे से देश का कोई भला नहीं होगा।"
'मोदी जो कहते हैं, उसमें सच्चाई कम-फरेब ज्यादा'
तीसरे मोर्चे से जुड़ने की संभावनाओं को खारिज करने के बाद मायावती ने नरेंद्र मोदी और भाजपा को निशाने पर लेते हुए तगड़ा हमला किया। उन्होंने कहा, " मोदी जो कुछ कहते हैं, उसमें सच्चाई कम होती है। उसमें झूठ ज्यादा होता है, फरेब ज्यादा होता है।"
मायावती ने कहा, "दरअसल, मोदी की रैलियों में जनता को गुमराह किया जाता है। हमारा भाजपा के बारे में शुरू से कहना रहा है कि उसके कहने और करने में काफी फर्क होता है।"
बसपा सुप्रीमो से जब यह पूछा गया कि क्या वह नरेंद्र मोदी को रोकने की कोशिश करेंगी, क्योंकि हालिया वक्त में उनसे जुड़ी चुनावी संभावनाएं बेहतर दिख रही हैं, तो इस पर मायावती ने करारा जवाब दिया।
'सांप्रदायिक ताकतों को रोकना जरूरी'
मायावती ने कहा, "अगर हमें इन्हें नहीं रोकना होता, तो केंद्र में यूपीए 1, यूपीए 2 या इससे पहले भी हमने जो भाजपा को रोकने, सांप्रदायिक ताकतों को रोकने की कोशिश की, वो न की होती।"
उन्होंने कहा, "यूपीए सरकार की कुछ नीतियों से हम भी सहमत नहीं थे, लेकिन सांप्रदायिकता को रोकने के लिए ऐसा किया। हम नहीं चाहते थे कि केंद्र में सांप्रदायिक ताकतों को मजबूत होने का मौका मिले।"
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि जहां तक मोदी का सवाल है, तो इसका सीधा मतलब है सांप्रदायिक ताकत को बढ़ावा देना। भाजपा इसका प्रतीक है। नरेंद्र मोदी इसी सांप्रदायिकता के प्रतीक हैं।
देश भूला नहीं है गोधरा कांडः मायावती
बहुजन समाज पार्टी ने साफ कर दिया है कि मोदी और भाजपा को उन्हें लेकर अपनी रणनीति चमकानी शुरू कर देनी चाहिए, क्योंकि वह आगामी लोकसभा चुनावों में उनका खुलकर विरोध करेंगी।
मायावती ने कहा, "भाजपा को रोकने के लिए हम हरसंभव कोशिश करेंगे। गोधरा कांड किसी से छिपा नहीं है, जिसमें बेकसूर लोग मारे गए। देश भर में मोदी के नाम से अल्पसंख्यक घबराए हुए हैं। यदि यह सत्ता में पहुंच गए, तो मुस्लिम समाज सुरक्षित नहीं महसूस करेगा।"
बसपा प्रमुख ने कहा, "यह देश के हित में है, अल्पसंख्यक समुदाय के हित में है कि सांप्रदायिक ताकतों को दूर केंद्र की सत्ता से दूर रखा जाएगा और हम इसके लिए पूरा जोर लगाएंगे।"