राष्ट्रीय जनता दल के मुखिया लालू प्रसाद यादव की उत्तर प्रदेश में मायावती और मुलायम को भी हाथ मिलाकर भाजपा के खिलाफ लड़ने की अपील को दोनों दलों ने खारिज कर दिया है।
दोनों दल प्रदेश ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर आपसी गठबंधन की संभावना को खारिज कर रहे हैं।
सपा ने कहा है कि बिहार में भले ही लालू और नीतीश भाजपा के सामने को खुद को बचाने के लिए हाथ मिलाना पड़े हों लेकिन उत्तर प्रदेश में सपा अपने दम पर भाजपा को टक्कर देने की कोशिश कर रही है।
बदनाम हो चुकी है सपा सरकार
उधर, बसपा का भी मानना है कि उत्तर प्रदेश में ही नहीं बल्कि देश भर में सपा सरकार की इतनी बदनामी हो गई है। उसके साथ हाथ मिलाने से फायदा कम घाटा ज्यादा है।
लालू और नीतीश कुमार के फॉर्मूले पर सपा और बसपा फिलहाल कोई विचार करना नहीं चाहती। बसपा के एक वरिष्ठ सांसद ने कहा कि अगर बसपा सपा के साथ जाती है तो उसका अपना दलित वोट बैंक कभी वापस नहीं आ पाएगा।
सांसद ने कहा कि पार्टी को भले एक सीट न मिले। लेकिन देशभर में पार्टी अकेले ही लड़कर खुद को मजबूत करेगी। उधर, सपा महासचिव नरेश अग्रवाल कहते है कि राष्ट्रीय स्तर पर भी बसपा के साथ गठबंधन की कोई संभावना नहीं है।
सपा देगी भाजपा को टक्कर
उन्होंने कहा कि सपा भाजपा को पटकनी देने के लिए काफी है। पार्टी अपने बहुमत के बल पर उत्तर प्रदेश में सत्ता में आई है। लोकसभा चुनाव में हार जरूर मिली है, लेकिन जल्द ही पार्टी प्रदेश में वापसी करेगी।
2008 में परमाणु करार के मुद्दे पर यूपीए सरकार से माकपा ने समर्थन वापस ले लिया था। तो उस समय सपा ने भी माकपा का साथ छोड़कर कांग्रेस से हाथ मिला लिया था।
तो दूसरी तरफ बसपा सुप्रीमो मायावती माकपा के साथ गठजोड़ कर तीसरे मोर्चे में शामिल हो गई थीं।